Uttar Pradesh

मदर्स डे विशेष : UP का मातृ सुरक्षा मॉडल बना मिसाल, गांव-गांव आंगनबाड़ी से बदली मां-बच्चों की जिंदगी

2.12 करोड़ महिलाओं और बच्चों को पोषण योजनाओं का लाभ, एनीमिया में कमी और संस्थागत प्रसव 84% पार, तकनीक, पोषण और निगरानी से मजबूत हुआ मातृ स्वास्थ्य अभियान

लखनऊ, 9 मई 2026:

यूपी में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर सरकार की पहल अब गांव-गांव बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश के 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्र पोषाहार वितरण के साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा केंद्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। मातृ दिवस के अवसर पर योगी सरकार की यह पहल सुरक्षित मातृत्व और कुपोषण मुक्त उत्तर प्रदेश के अभियान को नई मजबूती देती दिखाई दे रही है।

प्रदेश में 2 करोड़ 12 लाख बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाएं अनुपूरक पुष्टाहार योजनाओं से लाभान्वित हुई हैं। इसका असर सीधे मातृ स्वास्थ्य पर दिखा है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में पांच प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 84 फीसदी से अधिक पहुंच गया है। इसे मातृ सुरक्षा अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

योगी सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए पोषाहार वितरण में बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू की है। इससे वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है। सभी केंद्रों पर चार प्रकार के ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस और मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं की पोषण स्थिति की सटीक निगरानी हो सके। पोषण ट्रैकर एप के जरिए लगातार स्वास्थ्य मॉनिटरिंग की जा रही है।

इसके प्रभावी संचालन के लिए एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित किया गया है। कार्यकुशलता मापन में 98 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज होना इस अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

प्रदेश में 23 हजार से अधिक सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो रहे हैं, जबकि 266 नए केंद्रों को भी मंजूरी दी गई है। वहीं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 60 लाख से अधिक माताएं लाभान्वित हुई हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी महिलाओं को 1000 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।

बच्चों में कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे संभव अभियान के तहत 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 2.5 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर विशेष पोषण सेवाओं से जोड़ा गया है। साथ ही 35 लाख से अधिक बच्चों को प्रतिदिन हॉट कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है। 60 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिए पुष्टाहार वितरण ने महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा है।

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