Uttar Pradesh

UP में गन्ना किसानों के बहुरे दिन : सहूलियत के साथ समय पर भुगतान… ऐसे बदली तस्वीर

बंद मिलें फिर चालू, पेराई क्षमता 8.47 लाख टन प्रतिदिन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हर साल 35 हजार करोड़ का बूस्ट

लखनऊ, 5 मई 2026:

यूपी का चीनी उद्योग अब उत्पादन के साथ किसानों की समृद्धि और रोजगार का मजबूत आधार बन चुका है। सीएम योगी के नेतृत्व में बीते 9 वर्षों में गन्ना किसानों के लिए हुए बदलावों ने पूरे सेक्टर की तस्वीर ही बदल दी है। एक समय गन्ना किसान बकाया भुगतान के लिए दर-दर भटकते थे। हजारों करोड़ रुपये अटके रहते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

प्रदेश के गन्ना विभाग के अनुसार वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को 3.16 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है। इससे किसानों का भरोसा लौटने के साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। सरकार ने भुगतान सुधारने के साथ उत्पादन क्षमता में भी जबरदस्त इजाफा किया। प्रदेश में चीनी मिलों की पेराई क्षमता बढ़ाकर 8.47 लाख टन प्रतिदिन कर दी गई है। इससे पिछले 9 वर्षों में 9,156 लाख टन गन्ने की रिकॉर्ड पेराई संभव हो सकी।

योगी सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी मिलों को फिर से चालू कर उद्योग में नई जान फूंकी। बागपत की रमाला, बस्ती की मुंडेरवा और गोरखपुर की पिपराइच जैसी चीनी मिलों का पुनर्जीवन इसका बड़ा उदाहरण हैं। इसके साथ ही 44 से अधिक मिलों का आधुनिकीकरण और विस्तार किया गया।इससे सप्लाई चेन और उत्पादन दोनों में सुधार आया।

इस समय प्रदेश के 45 जिलों में 122 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं। ये सीधे तौर पर करीब 10 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। इसमें तकनीकी से लेकर सामान्य स्तर तक के युवा शामिल हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

सबसे बड़ा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। समय पर गन्ना भुगतान के चलते हर पेराई सत्र में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सर्कुलेशन हो रहा है। इससे गांवों के बाजारों में रौनक बढ़ी है और आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। मालूम हो कि प्रदेश का चीनी उद्योग अब संकट से उबरकर विकास और समृद्धि का प्रतीक बन चुका है, जहां किसान, युवा और उद्योग तीनों को फायदा मिल रहा है।

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