Uttar Pradesh

UP में अब श्रमिकों को कम वेतन नहीं, तीन श्रेणियों में बढ़ी मजदूरी की नई व्यवस्था लागू

राज्यपाल की मंजूरी के बाद नई दरों का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी, महंगाई और क्षेत्रीय लागत के आधार पर श्रमिकों को मिली अंतरिम राहत, नोएडा घटनाक्रम के बाद सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ/नोएडा, 18 अप्रैल 2026:

यूपी में हालिया नोएडा घटनाक्रम के बाद योगी सरकार ने श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच बने गतिरोध को खत्म करने के लिए बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन लागू कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नई दरों का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इससे ये अब पूरे प्रदेश में कानूनी रूप से बाध्यकारी हो गई हैं।

सरकार ने उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित करते हुए मजदूरी दरें तय की हैं। इससे अलग-अलग क्षेत्रों की जीवन-यापन लागत के अनुसार संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को शामिल किया गया है। यहां जीवनयापन महंगा होने के कारण अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है।

द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिलों को रखा गया है। यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किए गए हैं। वहीं तृतीय श्रेणी में शेष जिलों को शामिल किया गया है। इनमें क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) भी शामिल है।

मालूम हो कि वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाने के कारण श्रमिकों और वास्तविक वेतन के बीच अंतर बढ़ गया था। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाकर लंबित पुनरीक्षण को लागू किया गया है। इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए राज्य सरकार ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।

इस समिति में श्रम एवं सेवायोजन विभाग, एमएसएमई विभाग और श्रमायुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, साथ ही श्रमिकों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई। समिति ने जमीनी स्तर पर संवाद कर संतुलित प्रस्ताव तैयार किया। इसके आधार पर यह निर्णय लिया गया।

सरकार का कहना है कि यह कदम श्रमिकों को राहत देने के साथ ही औद्योगिक शांति बनाए रखते हुए उत्पादन चक्र को भी सुचारु बनाए रखने में सहायक होगा। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई दरों के पालन में किसी भी तरह की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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