Uttar Pradesh

खेती में पानी की गारंटी, कमाई के कई रास्ते…मुनाफे का सौदा बनी ‘खेत तालाब योजना’

यूपी में किसानों को मिल रहा दोहरा फायदा, सरकार आधी लागत खुद उठा रही और 52,500 रुपये तक अनुदान दे रही, खेत में बने तालाब से सिंचाई के साथ मछली पालन, सिंघाड़ा व मोती उत्पादन जैसे अतिरिक्त आमदनी के मौके भी मिल रहे

लखनऊ, 16 मई 2026:

उत्तर प्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने की दिशा में खेत तालाब योजना असरदार साबित हो रही है। इस योजना के जरिए किसानों को जल संरक्षण, सिंचाई की स्थायी सुविधा और खेती के साथ अतिरिक्त आय के नए साधन उपलब्ध करा रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित यह योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।

खेत तालाब योजना का मकसद बारिश के पानी को खेत में ही रोककर उसका इस्तेमाल सिंचाई के लिए करना है। लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच यह योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। खेतों में बनाए जा रहे तालाब वर्षा जल को संजोते हैं, जिससे सूखे के दौरान भी फसलों को पानी मिल जाता है और खेती मौसम पर कम निर्भर रहती है।

योजना के तहत 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 3 मीटर गहरा तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत 1,05,000 रुपये तय की गई है। इसमें सरकार 52,500 रुपये का अनुदान देती है, यानी कुल खर्च का आधा हिस्सा सरकार वहन करती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान भी आसानी से योजना का लाभ उठा पा रहे हैं।

Khet Talab Yojana Guaranteed Irrigation for Farmers (1)

यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। खेत तालाब के जरिए किसान मछली पालन, सिंघाड़ा उत्पादन, मोती उत्पादन और दूसरी जलीय गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। इससे खेती के साथ कमाई के अतिरिक्त स्रोत तैयार हो रहे हैं और किसानों की आय बढ़ रही है।

प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई तकनीक को भी बढ़ावा दे रही है। स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर 15,000 रुपये या लागत का 50 प्रतिशत तक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे सिंचाई की लागत घट रही है और पानी का बेहतर इस्तेमाल संभव हो रहा है।

योजना में चयन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। कृषि विभाग के पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर पहले आओ, पहले पाओ के सिद्धांत पर किसानों का चयन किया जाता है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और पात्र किसानों को बिना सिफारिश के सीधे लाभ मिल रहा है।

कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी आरपी कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार खेती को तकनीक आधारित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है। उनके मुताबिक जल संरक्षण, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और खेती के साथ मछली पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने से हजारों किसान अपनी आय में बढ़ोतरी कर रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की पैदावार सुधर रही है और किसानों की मौसम पर निर्भरता कम हो रही है।

अनुदान दो किस्तों में दिया जाएगा। पहली किस्त तालाब की खुदाई पूरी होने के बाद जारी होगी। दूसरी किस्त पानी के प्रवेश मार्ग यानी इनलेट और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद मिलेगी। आवेदन के लिए किसान की फार्मर रजिस्ट्री होना जरूरी है। ऑनलाइन आवेदन के साथ 1,000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो बाद में वापस कर दी जाएगी। इच्छुक किसान कृषि विभाग के एग्री दर्शन पोर्टल पर जाकर बुकिंग कर सकते हैं। बुकिंग के 15 दिनों के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिनों के अंदर तालाब तैयार करना होगा।

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