लखनऊ, 17 मई 2026:
यूपी को देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने के लिए योगी सरकार ने अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा दांव खेला है। स्वदेशी गोवंश संरक्षण, गांवों में रोजगार सृजन और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार ने ‘ऑपरेशन-4’ रणनीति लागू की है। इस मेगा डेयरी मास्टर प्लान के जरिए गांव-गांव डेयरी क्रांति लाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
सरकार की इस रणनीति के केंद्र में चार बड़ी योजनाएं हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना, नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शामिल है। इन योजनाओं का मकसद सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पशुपालन को गांवों में बड़े रोजगार मॉडल के रूप में स्थापित करना है।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के मुताबिक छोटे और मध्यम किसानों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के लिए बेहद आसान वित्तीय मॉडल तैयार किया गया है। योजना के तहत 50 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और सिर्फ 15 प्रतिशत लाभार्थी निवेश के जरिए 2 गाय से लेकर 25 गाय तक की डेयरी इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के तहत दो गायों की डेयरी यूनिट पर अधिकतम 80 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं अधिक दूध देने वाली स्वदेशी नस्ल की गाय पालने वाले पशुपालकों को मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
योगी सरकार इस समय गिर, साहीवाल और गंगातीरी जैसी स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि इन नस्लों से न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ेगा बल्कि दूध की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
इस मास्टर प्लान का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। अब तक स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के तहत 1500 से अधिक डेयरी इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। वहीं 7250 से ज्यादा पशुपालकों को पुरस्कार दिए जा चुके हैं। इसके अलावा नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में 72 और मिनी नन्दिनी योजना में 245 आधुनिक डेयरी इकाइयों का संचालन शुरू हो चुका है। योगी सरकार अब पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर गांवों में नई आर्थिक ताकत तैयार करने में जुटी है।






