राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 19 मई 2026:
उत्तराखंड में मेडिकल लैब तकनीशियनों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सेवा नियमावली लागू करने, रिक्त पदों पर भर्ती और सरकारी लैबों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर मंगलवार को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ ने सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की और सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।
सचिवालय पहुंचने से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इससे नाराज लैब तकनीशियन सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सचिव स्तर के अधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर एकता विहार ले जाकर छोड़ दिया।
संघ के अध्यक्ष आशीष खाली ने कहा कि राज्य गठन से पहले से प्रदेश में बीएस एमएलटी कोर्स संचालित हो रहा है। हर साल सैकड़ों छात्र इस क्षेत्र में प्रशिक्षित होकर निकल रहे हैं लेकिन 26 वर्षों बाद भी उनके लिए स्पष्ट सेवा नियमावली तक नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और पंजीकृत अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों से वंचित हैं जबकि अस्पतालों में लैब तकनीशियनों की भारी कमी बनी हुई है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से आईपीएचएस मानकों के अनुरूप पद सृजन और नियमावली संशोधन के प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे, लेकिन फाइलें आज तक शासन स्तर पर लंबित पड़ी हैं। संघ ने सरकारी लैबों के निजीकरण का भी कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि निजी कंपनियों को लैब संचालन सौंपने से स्थायी रोजगार खत्म हो रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मशीनें बेकार पड़ी धूल फांक रही हैं।
संघ ने मांग की कि आईपीएचएस मानकों के अनुसार नए पद सृजित किए जाएं, रिक्त पदों पर वर्षवार मेरिट के आधार पर भर्ती हो और ओवरएज अभ्यर्थियों को एकमुश्त आयु सीमा में छूट दी जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा तथा अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ के प्रदेश महासचिव मयंक राणा, कोषाध्यक्ष देवेन्द्र दत्त, उपाध्यक्ष सुनील रतूड़ी, संगठन मंत्री अनुराग पंत, संयुक्त सचिव मोहित लखेड़ा, सदेश शर्मा समेत कई लोग शामिल थे।






