लखनऊ, 19 मई 2026:
यूपी में गो संरक्षण अब आस्था और परंपरा तक सीमित नहीं रहेगा। इसे वैज्ञानिक कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार क्रांति के बड़े मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार गोशालाओं को आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास केंद्र में बदलने की तैयारी में जुटी है। इस महत्वाकांक्षी योजना में आईआईटी कानपुर की उन्नत तकनीक अहम भूमिका निभाने जा रही है।
प्रदेश की गोशालाओं को अब पशु संरक्षण केंद्र के साथ जैविक खेती, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर उत्पादन और ग्रामीण रोजगार के मजबूत आधार के रूप में विकसित किया जाएगा। गोबर और गोमूत्र से वैज्ञानिक तरीके से हाई-क्वालिटी जैविक उर्वरक तैयार करने की आधुनिक तकनीक आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी स्कॉलर अक्षय श्रीवास्तव ने विकसित की है।
इस शोध एवं तकनीकी विकास का नेतृत्व प्रोफेसर अमिताभ बंदोपाध्याय कर रहे हैं। नई तकनीक के जरिए गोबर और गोमूत्र को वैज्ञानिक प्रोसेसिंग के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर में बदला जाएगा। इससे किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और खेती अधिक प्राकृतिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बन सकेगी। सरकार का मानना है कि यह मॉडल किसानों की लागत घटाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
योगी सरकार इस पूरी व्यवस्था को माइक्रो-आंत्रप्रेन्योरशिप मॉडल से जोड़ने की तैयारी में है। इसके तहत ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को छोटे स्तर पर फर्टिलाइजर यूनिट्स स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। गांव स्तर पर उत्पादन और बिक्री का नेटवर्क तैयार कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।
सरकार की योजना है कि गोशालाओं में तैयार जैविक उत्पाद सीधे किसानों तक पहुंचें जिससे गांवों में आय का मजबूत चक्र विकसित हो सके। यह मॉडल केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। ये ग्रामीण क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।
यूपी गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हुआ तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। योगी सरकार गो संरक्षण को आधुनिक विज्ञान और ग्रामीण विकास से जोड़कर देश के सामने नया विकास मॉडल पेश करने जा रही है।






