लखनऊ, 17 मई 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएससी छात्रा के कथित शोषण के प्रयास और पेपर लीक प्रकरण ने अब बड़ा रूप ले लिया है। मामले में गिरफ्तार किए गए जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह पर पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। जेल भेजे जाने के बाद पुलिस टीम ने अवकाश होने के बावजूद विश्वविद्यालय परिसर पहुंचकर प्रोफेसर के चैंबर और विभागीय कमरों की गहन तलाशी ली।
पुलिस ने उनके लैपटॉप और मोबाइल फोन को कब्जे में लेकर चैंबर सील कर दिया है। पुलिस का मानना है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कई अहम डिजिटल सबूत मिल सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था। इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
दो दिन पूर्व पूरा मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब प्रोफेसर और बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा के बीच बातचीत के दो कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। वायरल ऑडियो में प्रोफेसर कथित तौर पर छात्रा से कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्होंने उसके लिए दो पेपर लीक करा दिए हैं और उसे मिलने के लिए बुला रहे हैं। ऑडियो सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में सनसनी फैल गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आनन-फानन में शिक्षक के खिलाफ पेपर लीक और अन्य आरोपों को लेकर केस दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रोफेसर को हिरासत में लिया और बाद में अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।
उधर, विश्वविद्यालय स्तर पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। कुलपति के निर्देश पर गठित आंतरिक शिकायत समिति ने अपनी जांच पूरी कर ली। हालांकि समिति की रिपोर्ट अभी कुलपति को औपचारिक रूप से नहीं सौंपी गई है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक रिपोर्ट सोमवार तक सौंप दी जाएगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक दोनों पक्षों के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जांच पूरी कर ली गई है। यह रिपोर्ट सोमवार को होने वाली कार्यकारी परिषद की आकस्मिक बैठक में पेश की जाएगी। माना जा रहा है कि इसी बैठक में आरोपी शिक्षक के खिलाफ निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक का बड़ा फैसला लिया जा सकता है।






