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पासी समाज के स्वाभिमान से जुड़ा ‘गौरव द्वार’ विवाद…पूर्व मंत्री के धरने में उतरे भाजपा विधायक

मलिहाबाद में हटाए गए महाराजा मल्हिया पासी स्मृति द्वार को लेकर सियासी ताप बढ़ा, पूर्व मंत्री कौशल किशोर, विधायक जयदेवी के साथ दो अन्य भाजपा विधायकों व पासी समाज के संगठनों की एंट्री से व्यापक हुआ आंदोलन, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

प्रमोद कुमार

मलिहाबाद (लखनऊ), 26 अप्रैल 2026:

मलिहाबाद में महाराजा मल्हिया पासी के नाम पर बने ‘गौरव द्वार’ को हटाए जाने का विवाद अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है। पिछले 20 घंटे से अधिक समय से पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर और क्षेत्रीय विधायक जय देवी कौशल मोहान तिराहे पर टेंट के नीचे सड़क किनारे धरने पर डटे हैं। अब इसमें दो भाजपा विधायक और व अन्य संगठन भी शामिल हो गए हैं।

रविवार दोपहर बाद भाजपा के पासी समाज से जुड़े दो और विधायक अमरीश रावत (मोहनलालगंज) और ब्रजेश रावत (मोहान, उन्नाव) भी धरने में पहुंच गए। इसके साथ ही सुहेलदेव आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश पासी और लाखन आर्मी के अध्यक्ष सूरज पासी भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर डटे हैं। इससे साफ है कि यह मुद्दा अब सिर्फ स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है।

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एक बार फिर से पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि मलिहाबाद को बसाने वाले महाराजा मल्हिया पासी की स्मृति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि जब तक स्मृति द्वार को उसी स्थान पर दोबारा स्थापित नहीं किया जाता, धरना जारी रहेगा। उनके मुताबिक यह केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है।

विधायक जय देवी कौशल ने बताया कि उनकी निधि से क्षेत्र में 12 स्मृति द्वार बनाए जाने थे, जिनमें 11 पहले ही स्थापित हो चुके हैं। 12वां द्वार तहसील रोड पर महाराजा मल्हिया पासी की स्मृति में बनाया गया था, जिसे 21 और 22 अप्रैल की रात निर्माण कंपनी द्वारा चुपचाप हटा दिया गया। विरोध बढ़ने के बाद पुलिस ने द्वार को बरामद तो कर लिया, लेकिन वह अब तक मलिहाबाद थाने के पास वाहन पर ही रखा है।

इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक जय देवी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है और कार्यशैली पर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने अवध गजेटियर का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र के संस्थापक के सम्मान के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह सिर्फ एक द्वार का मामला नहीं, बल्कि इलाके के इतिहास, सम्मान और पहचान से जुड़ा मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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