
लखनऊ, 30 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थिकलश को हटाए जाने की आशंका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के कार्यकर्ताओं ने विधानभवन के पास स्थित अंबेडकर महासभा परिसर में स्थापित अस्थिकलश के कथित विस्थापन के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हजरतगंज चौराहे से विधानभवन के सामने स्थित अस्थिकलश स्थल तक विरोध मार्च निकालने के लिए जुटे लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
प्रदर्शन के दौरान आरपीआई कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर बाबा साहेब के अस्थिकलश को विस्थापित नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी ने घोषणा की कि प्रदेशभर में ज्ञापन देकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसके बावजूद सरकार ने अस्थिकलश से किसी प्रकार की छेड़छाड़ की तो 9 अगस्त को लखनऊ में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

आरपीआई के प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं अपितु भारतीय संविधान के निर्माता और सामाजिक न्याय, समानता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उनसे जुड़ी किसी भी धरोहर के साथ लापरवाही या छेड़छाड़ देशवासियों की भावनाओं को आहत करेगी। उन्होंने कहा कि अस्थिकलश करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। पार्टी अपनी आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने बताया कि पार्टी हजरतगंज के अटल चौक स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा से अस्थिकलश स्थल तक पैदल यात्रा निकालना चाहती थी लेकिन भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें रोक दिया गया। हालांकि इस पूरे विवाद के बीच बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा ने पहले ही स्थिति स्पष्ट करते हुए पूरे मामले पर विराम लगाने की कोशिश की।

महासभा के महामंत्री अमरनाथ प्रजापति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि माई साहेब डॉ. सविता अंबेडकर द्वारा स्थापित बाबा साहेब के अस्थिकलश को कहीं और स्थानांतरित किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महासभा परिसर में स्थापित अस्थिकलश अपने वर्तमान स्थान पर पूरी तरह सुरक्षित है। उसे हटाने या विस्थापित करने की कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है।






