Raebareli City

ममता को बनाया हथियार, मासूमों का करते थे सौदा… बच्चे चुराने वाले गैंग का भंडाफोड़

रायबरेली में नौ आरोपी गिरफ्तार, 9 माह का बच्चा सकुशल मुक्त, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर अकेली महिलाओं को बनाते थे निशाना, लाखों में होती थी मासूमों की डील

विजय पटेल

रायबरेली, 20 मई 2026:

यूपी के रायबरेली में पुलिस ने नवजात बच्चों की चोरी और अवैध बिक्री करने वाले एक खतरनाक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया है जिनमें 4 महिलाएं और 5 पुरुष शामिल हैं। गिरोह के कब्जे से चोरी किया गया 9 माह का मासूम बच्चा सकुशल मुक्त कराया गया है। वारदात में इस्तेमाल की जा रही एक लग्जरी कार भी पुलिस ने कब्जे में ली है।

पूरा मामला कोतवाली नगर क्षेत्र का है। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की रहने वाली एक महिला अपने पति से नाराज होकर दिल्ली से लखनऊ आई थी और वहां से त्रिवेणी एक्सप्रेस के जरिए मायके सिंगरौली जा रही थी। उसके साथ उसका दो साल का बेटा और 9 माह का छोटा बच्चा भी था। यात्रा के दौरान ट्रेन में एक महिला और पुरुष उससे दोस्ती गांठने लगे। बातचीत और सहानुभूति का जाल बिछाकर आरोपी महिला ने बच्चे को खिलाने के बहाने गोद में ले लिया।

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रायबरेली स्टेशन पहुंचने पर दोनों आरोपी महिला को बहला-फुसलाकर स्टेशन के बाहर स्थित भोजनालय तक ले गए और मौका मिलते ही 9 माह के मासूम को लेकर फरार हो गए। घटना के बाद बदहवास मां ने कोतवाली नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एसओजी और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया।

सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने रेलवे कॉलोनी पानी की टंकी के पास छापा मारकर पूरे गिरोह को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के अररिया निवासी रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी, उत्तराखंड के उधमसिंहनगर निवासी किरणजीत उर्फ सरदार आंटी, रामपुर निवासी सुमित कुमार, मुरादाबाद निवासी संजय कुमार, ब्रह्मपाल सिंह, अर्चना और बबीता तथा अमरोहा निवासी हरिश्चंद्र शामिल हैं।

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह सुनियोजित तरीके से नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करता था। आरोपी अस्पतालों, गांवों और कस्बों में सक्रिय आशा बहुओं व स्थानीय नेटवर्क के जरिए ऐसे दंपतियों की तलाश करते थे जिन्हें संतान चाहिए होती थी। इसके बाद रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों पर अकेली महिलाओं को निशाना बनाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक मासूमों का लाखों रुपये में सौदा होता था और रकम गिरोह के सदस्यों में बांटी जाती थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला है। अब तक कितने मासूम इनके शिकार बन चुके हैं।

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