अनिल निषाद
अयोध्या, 20 मई 2026:
अयोध्या में लक्ष्मण पथ परियोजना की जद में आए 250 निषाद परिवारों को बेघर होने का खतरा सता रहा है। उनका कहना है कि यहां से उनकों उजाड़ दिया गया तो वह कहां जाएंगे। अपनी इसी पीड़ा को लेकर ये परिवार बुधवार को जिलाधिकारी के पास पहुंचे और उनसे अपने घरों को बचाने की गुहार लगाईं।
अयोध्या में विकास परियोजनाओं की रफ्तार तेज है, लेकिन इसी के साथ अब विस्थापन का दर्द भी सामने आने लगा है। गुप्तारघाट से राजघाट तक बन रहे लगभग 9 किलोमीटर लंबे लक्ष्मण पथ की जद में सरयू किनारे बसे जमथरा माझा के करीब 250 निषाद परिवार आ गए हैं।

इन परिवारों का कहना है कि वे पिछले 60 से 70 वर्षों से यहां रह रहे हैं, लेकिन अब निर्माण कार्य के चलते उन्हें हटाया जा रहा है। निषाद समुदाय के प्रतिनिधि संतोष निषाद के नेतृत्व में महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई।
पीड़ितों का आरोप है कि अब तक ना तो उन्हें वैकल्पिक जमीन दी गई है और ना ही रहने के लिए मकान। परिवारों की मांग है कि पहले उनका पुनर्वास किया जाए, उसके बाद ही उन्हें हटाया जाए। इस मुद्दे को लेकर निषाद परिवार पहले भी प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
जिलाधिकारी कार्यालय में निषाद समाज के संतोष निषाद, श्याम लाल निषाद, अमरजीत निषाद, मिलन निषाद, कुश निषाद, आकाश निषाद, हेमंत निषाद रोहित प्रधान, धर्मेंद्र निषाद, लाली निषाद, बाबूराम निषाद, वीरेंद्र निषाद आदि मौजूद।






