लखनऊ, 24 मई 2026:
प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ बिजली मांग के बीच सीएम योगी ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि जनता को बिजली संकट का सामना नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित रहने या शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की मौजूदगी में रविवार को पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में ऊर्जा विभाग को पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ काम करना होगा। उन्होंने सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग और त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी तापीय परियोजनाओं की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है। जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट बिजली मिल रही है। मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के जरिए 3,742 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन क्षमता में 86 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

सीएम ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें और 715 उपकेंद्र संचालित हैं। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत तक पहुंच गई है जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।
गर्मी के चलते बिजली मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन पहुंच गई, जबकि पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक दर्ज की गई। 20 से 22 मई के बीच उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।
बैठक में यह भी बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान से 38 सब स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे लेकिन तेजी से मरम्मत कर आपूर्ति बहाल कर दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद फील्ड स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष फोकस किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को फिर से पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया है। जून 2026 से उपभोक्ताओं को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड बिल भेजे जाएंगे। साथ ही 15 मई से 30 जून तक विशेष कैंप लगाकर स्मार्ट मीटर शिकायतों का समाधान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आपूर्ति केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सिंचाई व्यवस्था और आमजन के जीवन से सीधे जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।






