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जल जांच बनी ग्रामीण महिलाओं की ताकत, UP सरकार के एफटीके अभियान से बढ़ा स्वावलंबन

जल जीवन मिशन के तहत 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाएं कर रहीं पानी की गुणवत्ता जांच, मानदेय के जरिए मिल रहा रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण

लखनऊ, 28 मई 2026:

यूपी सरकार का जल जीवन मिशन अब हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के अभियान के साथ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और तकनीकी सशक्तीकरण का भी मजबूत माध्यम बन रहा है। प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) से जोड़कर सरकार ने उन्हें जल गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे गांवों में शुद्ध पेयजल की निगरानी मजबूत हुई है। महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय के नए अवसर भी खुले हैं।

नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश की लगभग सभी ग्राम पंचायतों और राजस्व गांवों में पांच-पांच महिलाओं के समूह को फील्ड टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में करीब 97,070 गांवों में प्रशिक्षित महिलाएं पूरी सक्रियता के साथ जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य कर रही हैं।

चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 63,700 जल गुणवत्ता नमूनों की जांच की जा चुकी है। गांव स्तर पर महिलाएं पाइपलाइन, ट्यूबवेल और अन्य पेयजल स्रोतों से जल नमूने लेकर उनकी जांच कर रही हैं। एफटीके के जरिए पानी में मौजूद हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया की पहचान की जा रही है। यदि किसी स्रोत का पानी संदिग्ध या दूषित पाया जाता है तो इसकी तत्काल सूचना विभाग को दी जाती है। इससे समय रहते कार्रवाई संभव के साथ जलजनित बीमारियों की रोकथाम की जा सकेगी।

पहले पानी की जांच के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब गांव स्तर पर ही जांच सुविधा उपलब्ध होने से त्वरित कार्रवाई हो रही है। इससे ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिली है। यह अभियान महिलाओं के लिए स्वरोजगार का जरिया भी बन रहा है। जल गुणवत्ता परीक्षण कार्य के लिए महिलाओं को प्रति जांच 20 रुपये की दर से भुगतान किया जाता है। अधिकतम 20 जांच के लिए उन्हें 400 रुपये तक का मानदेय मिलता है।

इससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ रही है। उनमें आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है। महिलाओं को इस कार्य के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्विलांस कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षण में एफटीके संचालन, जल नमूना संग्रहण, विभिन्न पैरामीटर्स की जांच, मोबाइल ऐप पर रिपोर्टिंग और सुरक्षित पेयजल के मानकों की जानकारी दी जा रही है। सरकार की यह पहल अब ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण का सफल मॉडल बनकर उभर रही है।

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