Uttarakhand

मदरसा कमेटियों के काले कारनामों का खुलासा… 11 हजार बच्चों के रिकॉर्ड गायब, ले रहीं थीं सरकारी लाभ

वेरिफिकेशन में मदरसा इंतजामिया समितियों की खुली पोल, हरिद्वार में मिली गड़बड़ी, विशेष सचिव बोले- जुलाई से पहले मदरसों को नए पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा, दोषियों पर होगी कार्रवाई

योगेंद्र मलिक

हरिद्वार, 29 मई 2026:

उत्तराखंड में मदरसा इंतजामिया समितियों के काले कारनामे सामने आए हैं। यह समितियां फर्जीवाड़ा कर सरकार से हर महीने मदरसों के लिए मिलने वाला अनुदान और सुविधाएं लेती रहीं। हरिद्वार में मदरसों से जुड़े रिकॉर्ड के वेरिफिकेशन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। यहां मदरसा बोर्ड में दर्ज लगभग 31 हजार छात्रों की संख्या में सत्यापन के बाद 19,400 छात्र ही मिले। करीब 11,600 छात्रों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं था। अब इन समितियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि एक महीने के भीतर कई मदरसों पर एक साथ छापेमारी और सत्यापन कार्य किए गए। कुछ मदरसों ने स्वयं बंद करने के आवेदन भी दे दिए हैं। जिन संस्थानों में मिड डे मील में दिखाए गए बच्चों और वास्तविक उपस्थिति में मिलान नहीं हुआ, उनके खिलाफ जिला प्रशासन रिकवरी की कार्रवाई करेगा और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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उत्तराखंड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ मदरसों में छात्रों की फर्जी संख्या दाखिल कर अनुदान और खाद्य सामग्री ली जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह जांच कराई गई। इसके बाद हरिद्वार जिले में शिकायतें सही निकलीं। इसी प्रकार अन्य जिलों में भी सत्यापन चल रहा है।

विशेष सचिव ने बताया कि जुलाई से पहले मदरसों को नए पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा। जिन संस्थाओं का पंजीकरण नई प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होगा,उन्हें बंद कर दिया जाएगा। मदरसों के पंजीकरण और निगरानी की व्यवस्था में बदलाव भी किए जा रहे हैं। सीएम ने एक जुलाई से मौजूदा मदरसा बोर्ड खत्म कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। इसके बाद मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को राज्य के शिक्षा बोर्ड के साथ-साथ इस प्राधिकरण से भी अनुमति लेना आवश्यक होगा।

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