लखनऊ, 2 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा का शुभारंभ किया तो परिसर रामभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। कथा के पहले दिन उन्होंने राष्ट्र को राममय बनाने का अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया अभूतपूर्व तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है लेकिन भारत भगवान की कृपा, प्रेम और आध्यात्मिक शक्ति के कारण सुरक्षित एवं सशक्त बना हुआ है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पंचवटी प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए लक्ष्मण द्वारा भगवान राम से पूछे गए पांच महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके उत्तरों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि रामकथा धार्मिक आयोजन के साथ जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन है। कथा के दौरान उन्होंने नवधा भक्ति के नौ स्वरूपों श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन का उल्लेख करते हुए बताया कि भक्ति मनुष्य को ईश्वर से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की रक्षा करना हर नागरिक का दायित्व है। भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष 14 जनवरी से चित्रकूट में गुरुकुलम् की स्थापना की जाएगी। इस संस्थान के माध्यम से भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही विश्वभर के लोगों को ऑनलाइन माध्यम से संस्कृत शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
रामभद्राचार्य ने रामजन्मभूमि प्रकरण और भोजशाला मामले का उल्लेख करते हुए इन्हें भारतीय सांस्कृतिक चेतना और गौरव की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली ऐतिहासिक उपलब्धियों के रूप में याद की जाएंगी।
इससे पहले भव्य कलश एवं पोथी यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ कथा स्थल तक यात्रा निकाली। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक डॉ. नीरज बोरा ने सपरिवार गुरुपाद पूजन कर किया। इस अवसर पर उत्सव संस्था, भारत लोक शिक्षा परिषद, श्यामप्रेमी संघ, बोरा फाउंडेशन सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का वातावरण देखने को मिला।






