लखनऊ, 2 जून 2026:
यूपी में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ सियासी बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में योगी सरकार के मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए अखिलेश यादव और उनके समर्थकों को निशाने पर लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और गरीबों, बहुजनों तथा गैर-यादव पिछड़े वर्ग के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ अपनी आवाज लगातार उठाते रहेंगे।
.@yadavakhilesh जी अगर आपको लगता है कि मैं आपसे या आपके लोडरों की धमकियों से डर जाउंगा तो आप गलतफहमी में हैं…गरीबों, बहुजनों, आम नागरिकों और गैर यादव ओबीसी वर्ग के खिलाफ आपके वोटर पिछले 5 दिन में 5 बड़ी वारदातें कर दिए हैं और आप चाहते हैं कि मैं चुप रहूं…ये नहीं हो सकता है।…
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) June 2, 2026
पोस्ट में राजभर ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में हुई कई घटनाओं पर समाजवादी पार्टी नेतृत्व की चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने अमेठी में सपा विधायक महाराजी प्रजापति के साथ के घर हुई घटना, चंदौली में महिला सपा जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल से मारपीट, रामजन्म राजभर की हत्या, धनराज मौर्य और सूर्या चौहान से जुड़े मामलों तथा लखनऊ में संदीप सिंह की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं पर अखिलेश यादव की ओर से कोई संवेदनशील प्रतिक्रिया नहीं आई।
राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल आखिर इन घटनाओं पर मौन क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुजन और गैर-यादव पिछड़ा समाज अब सपा नेतृत्व की प्राथमिकता में नहीं है। इसी वजह से इन वर्गों में नाराजगी बढ़ रही है।
अपने संघर्षपूर्ण जीवन का जिक्र करते हुए राजभर ने कहा कि उन्होंने गरीबी, अपमान और संघर्ष को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी टेम्पो चलाकर समाज के कमजोर वर्गों के लिए संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी ऐसा करने का साहस रखते हैं। वहीं अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने उन्हें ट्विटर, एसी और पीसी वाले नेता बताया।
राजभर की इस तीखी टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। चुनावी माहौल के बीच इस बयान को सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के रूप में देखा जा रहा है।






