नई दिल्ली, 6 जून 2026:
देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए E85 ईंधन लॉन्च कर दिया गया है। यह ऐसा ईंधन है जिसमें 80 से 85 प्रतिशत एथेनॉल और 14 से 19 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसे खास तौर पर फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया गया है, जो E20 से लेकर E100 तक किसी भी एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने E85 को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में यह ईंधन 50 से 100 डिस्पेंसिंग स्टेशनों पर उपलब्ध होगा। दिसंबर 2026 तक इसकी पहुंच 500 पेट्रोल पंपों तक बढ़ाने की योजना है, जबकि दिसंबर 2027 तक इसे करीब 5,000 रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का दावा है कि E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल के मुकाबले करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम होगी। इसका सीधा लाभ वाहन चालकों को मिलेगा। साथ ही घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले एथेनॉल का फायदा भी उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर करीब 108 होता है, जो सामान्य पेट्रोल से ज्यादा है। इससे इंजन की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है और नॉकिंग जैसी दिक्कतें कम होने की संभावना रहती है।

केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि E85 केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए है। सामान्य पेट्रोल या E20 अनुकूल वाहन पहले की तरह चलते रहेंगे। E85 के आने से E20 ईंधन की व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ब्राजील समेत कई देशों में फ्लेक्स फ्यूल तकनीक का लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर आसानी से चल सकते हैं।
सरकार का अनुमान है कि यदि देश में बिकने वाले नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में आधे फ्लेक्स फ्यूल वाहन हो जाएं तो 312 करोड़ लीटर से अधिक अतिरिक्त एथेनॉल की मांग पैदा होगी। इससे किसानों को करीब 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिल सकती है। साथ ही हर साल लगभग 15,151 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण के मोर्चे पर भी E85 को अहम माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार फ्लेक्स फ्यूल वाहन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब 61 प्रतिशत तक कमी ला सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी घटेगी।
भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का स्तर 1.53 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। E85 की शुरुआत को इसी अभियान का अगला चरण माना जा रहा है।






