लखनऊ, 8 जून 2026:
यूपी को देश का सबसे बड़ा डिजिटल निवेश केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 2 गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए अधिकारियों को निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप नई और अधिक प्रभावी डेटा सेंटर नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यूपी डेटा सेंटर नीति-2021 की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल अवसंरचना भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ हैं। ऐसे में प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए अभी से दूरदर्शी और ठोस रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने नई नीति में एआई आधारित डेटा सेंटर, ऊर्जा दक्ष ग्रीन डेटा सेंटर, विश्वस्तरीय डिजिटल अवसंरचना, त्वरित अनुमोदन प्रणाली, निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतर कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत 900 मेगावाट क्षमता विकसित करने और 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले अब तक 21,342 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं। निवेशकों को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी किए जा चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में छह डेटा सेंटर पार्क और दो डेटा सेंटर इकाइयां संचालित हैं जबकि 644 मेगावाट की प्रतिबद्ध क्षमता पर कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने भूमि, पूंजी और ऋण संबंधी अनुदानों के साथ स्टाम्प शुल्क, विद्युत शुल्क तथा ट्रांसमिशन एवं व्हीलिंग शुल्क में मिलने वाली रियायतों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने उच्च क्षमता वाली एआई कंप्यूटिंग अवसंरचना विकसित करने वाले डेटा सेंटर पार्कों के लिए विशेष प्रोत्साहन व्यवस्था तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही ग्रीन डेटा सेंटर प्रमाणन प्राप्त करने वाली इकाइयों को अतिरिक्त वित्तीय लाभ देने की बात कही।
प्रदेश में वर्तमान में हीरानंदानी समूह, एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स, अडानी समूह, एसटी टेलीमीडिया, एसकेवीआर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, वेब वर्क्स और सिफी जैसी प्रमुख कंपनियों की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने 5,410 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर विकसित करने में रुचि दिखाई है। इनमें लगभग 4.90 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डेटा सेंटर विकास केवल एनसीआर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के साथ-साथ लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और सीतापुर जैसे शहरों में भी डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित किए जाएं जिससे डिजिटल निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास का लाभ पूरे प्रदेश तक पहुंच सके। इससे उत्तर प्रदेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत केंद्र बनने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाएगा।






