
इंटरटेनमेंट डेस्क, 26 जुलाई 2026:
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां, शिक्षा व्यवस्था की खामियां और बच्चों के सपनों को हल्के-फुल्के हास्य के साथ बड़े पर्दे पर उतारना आसान काम नहीं है। इस चुनौती को वेब सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ निभाती है। कॉमेडी और भावनाओं का संतुलित मेल लिए यह सीरीज मनोरंजन के साथ-साथ एक गंभीर सामाजिक संदेश भी देती है। कहानी दर्शकों को हंसाने के साथ ही एक अभिभावक के रूप में कई अहम सवाल भी खड़े करती है।
कहानी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल ‘आदर्श बाल विद्यालय’ के इर्द-गिर्द घूमती है। सरकार एक ऐसी योजना शुरू करती है जिसके तहत सबसे बेहतर बोर्ड परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूल के प्रिंसिपल को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी जाने का अवसर मिलेगा। यह खबर सुनते ही स्कूल के हेडमास्टर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी विदेश जाने का सपना संजो लेते हैं। यह किरदार चर्चित अभिनेता केके मेनन ने निभाया है।
इसके बाद वह अपने शिक्षकों और छात्रों के साथ बेहतर परिणाम लाने के मिशन में जुट जाते हैं।
हालांकि, इस सफर में उन्हें कई ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो सरकारी स्कूलों की वास्तविक तस्वीर सामने रखती हैं। आखिर वह अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं या नहीं, इसका जवाब सीरीज देखने के बाद ही मिलता है।
समीक्षकों के मुताबिक अभिनय के मोर्चे पर सीरीज मजबूत नजर आती है। केके मेनन अपने किरदार में पूरी तरह रचे-बसे दिखाई देते हैं। एक ईमानदार लेकिन महत्वाकांक्षी हेडमास्टर के रूप में उनका अभिनय कहानी को मजबूती देता है। अर्चना पूरन सिंह पार्टी कार्यकर्ता के रोल में प्रभाव छोड़ती हैं, जबकि देवेन भोजानी ‘गोल्डी’ के किरदार में अपनी सहज कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को खूब गुदगुदाते हैं। अभिमन्यु सिंह कड़क शिक्षक के रूप में स्कूल के पुराने दिनों की याद ताजा कर देते हैं। बाल कलाकारों का अभिनय भी कहानी को वास्तविकता के करीब ले जाता है।

निर्देशक हिमांक गौर ने सात एपिसोड की इस सीरीज को दिलचस्प अंदाज में पेश किया है। शुरुआती तीन एपिसोड दर्शकों को लगातार हंसाते हैं। कहानी से बांधे रखते हैं। हालांकि, इसके बाद कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए महसूस होते हैं। कुछ उपकथाएं मुख्य कहानी की रफ्तार को धीमा करती हैं। वहीं, क्लाइमैक्स भी दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता।
इसके बावजूद ‘आदर्श बाल विद्यालय’ एक ऐसी वेब सीरीज है जिसे सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को हल्के-फुल्के अंदाज में समझने के लिए भी देखा जा सकता है। दमदार अभिनय, देसी हास्य और भावनात्मक स्पर्श इसे एक यादगार पारिवारिक मनोरंजन बनाते हैं।






