Uttar Pradesh

अखिलेश vs पाठक : PDA से परिवारवाद तक छिड़ी सियासी जंग, सोशल मीडिया बना अखाड़ा

दरी-बिछाने से लेकर तुष्टिकरण तक तीखे आरोप, दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर साधा निशाना, बयानबाजी हुई और आक्रामक

लखनऊ, 13 अप्रैल 2026:

यूपी की सियासत में इस समय बयानबाजी का पारा चढ़ा हुआ है। समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बीच सोशल मीडिया पर तीखा वार-पलटवार देखने को मिल रहा है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर व्यक्तिगत और राजनीतिक हमले करते हुए बहस को और गर्म कर दिया है।

अखिलेश यादव ने एक पोस्ट के जरिए ब्रजेश पाठक पर तंज कसते हुए लिखा कि हार की हताशा, बिगाड़ती है भाषा। उन्होंने पाठक के राजनीतिक अनुभव पर कटाक्ष करते हुए ‘दरी बिछाने’ वाली टिप्पणी की और कहा कि अब उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि दरी बिछाने लायक भी नहीं रहे।

अखिलेश ने आगे तीखे शब्दों में कहा कि वह उनके कड़े बयानों पर क्रोधित नहीं होंगे, बल्कि सहानुभूति रखते हैं, क्योंकि वह इन दिनों अस्त-व्यस्त और असंतुलित नजर आ रहे हैं। उन्होंने पाठक के मंत्रालय तक पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि उन्हें शायद यह भी याद नहीं कि उनका विभाग कौन सा है। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि वह अपने भ्रष्टाचार के बिखरे सिक्के समेटने में लगे हैं।

इसके जवाब में ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए अखिलेश यादव पर वंशवाद और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिना जमीनी संघर्ष के वंशानुक्रम से सत्ता पाने वाले क्या जानें कि एक साधारण परिवार से निकलकर पहचान बनाना कितना कठिन होता है।

पाठक ने अखिलेश की राजनीतिक सोच को अपरिपक्व और प्रतिक्रियावादी बताते हुए आरोप लगाया कि वे तुष्टिकरण की राजनीति में हिंदुओं से दूर हो गए हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अखिलेश दीपावली का विरोध और ईद पर मिठाइयां बांटने जैसी राजनीति करते हैं।

डिप्टी सीएम ने कानून-व्यवस्था और पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा शासन में प्रदेश में अपराध चरम पर था, दलितों और कमजोर वर्गों का शोषण होता था और सरकार एक परिवार और एक जाति तक सीमित थी।

‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मुद्दे पर भी पाठक ने अखिलेश को घेरा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की अंत्येष्टि का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या यह पिछड़ों के सम्मान में शामिल था। वहीं, आजम खान के पुराने बयान का हवाला देते हुए अखिलेश की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए। इसके साथ ही पाठक ने भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकास, बेहतर कानून-व्यवस्था और सामाजिक सम्मान का दावा किया।

वहीं अखिलेश यादव ने PDA समाज के अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे बयान देने वालों को जनता माफ नहीं करेगी। उन्होंने यहां तक कहा कि यह बयान राजनीतिक आत्महत्या जैसा है और इसका असर पाठक के वर्तमान और भविष्य दोनों पर पड़ेगा।

दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें विचारधारा, जातीय समीकरण और विकास मॉडल जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं जिससे प्रदेश की राजनीति में नई हलचल तय मानी जा रही है।

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