
लखनऊ, 13 अगस्त 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सियासी बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की महिलाओं को 20 हजार रुपये देने की भाजपा सरकार की योजना पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे चुनावी जुमला बताते हुए भाजपा पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए अब पैसे के अलावा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि दूसरे राज्यों में महिलाओं को आर्थिक मदद देने के वादों को लेकर भी भाजपा सवालों के घेरे में रही है। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जागरूक महिलाएं इन वादों का हिसाब मांग रही हैं।
सपा प्रमुख ने अपने बयान में 50 हजार रुपये सालाना की राशि का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार पर पिछले 10 वर्षों के दौरान महिलाओं के हिस्से का पैसा नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने गणित के जरिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि 10 साल तक हर वर्ष 50 हजार रुपये दिए जाते तो प्रत्येक महिला के हिस्से में 5 लाख रुपये आते। अब 20 हजार रुपये देने की घोषणा उस रकम का महज 4 प्रतिशत है।
अखिलेश ने इसी आधार पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने महिलाओं के हक का 96 प्रतिशत हिस्सा दबा लिया और अब केवल 4 प्रतिशत देने का दावा कर रही है। उन्होंने इसे भाजपा के कथित ‘80:20’ फॉर्मूले से जोड़ते हुए कहा कि यहां 96:4 का नया रिकॉर्ड बनाया जा रहा है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने महिलाओं के अधिकारों पर खर्च करने के बजाय हजारों करोड़ रुपये प्रचार में खर्च किए। अखिलेश ने दावा किया कि आगामी चुनाव को देखते हुए भाजपा अब आर्थिक घोषणाओं का सहारा ले रही है।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा के संगठन और कार्यकर्ताओं पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि जनाक्रोश के डर से भाजपा के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भूमिगत हो गए हैं और पार्टी से टिकट लेने को भी कोई तैयार नहीं है। मंदिर में चोरी और बच्चों पर हमले जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने भाजपा पर नैतिकता और साहस खोने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की ओर से महिलाओं के लिए बड़ा वादा करते हुए कहा- ‘हम 40 हजार से करेंगे शुरुआत, जिसमें बढ़ोतरी होगी हर साल!’ चुनाव से पहले महिलाओं को लेकर सपा और भाजपा की घोषणाओं के बीच यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और धार दे सकता है।






