Uttar Pradesh

यमुना किनारे अक्रूर घाट बदलेगा वृंदावन की तस्वीर…आस्था व आधुनिकता का होगा संगम

6.35 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद घाट पर स्नान प्लेटफॉर्म, लाल पत्थर की सीढ़ियां व सुरक्षा ढांचा होगा तैयार, रंगोत्सव-2026 में रिकॉर्ड भीड़ के बाद सरकार ने ब्रज में धार्मिक पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर दिया जोर

लखनऊ, 8 मई 2026:

मथुरा-वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जल्द ही अक्रूर घाट पर नया अनुभव मिलने वाला है। यमुना नदी के दाहिने किनारे स्थित इस प्राचीन घाट का निर्माण और सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। प्रदेश सरकार ने 6.35 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी देते हुए 3.17 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिकता है। उनका कहना है कि अक्रूर घाट सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कृष्ण लीला से जुड़ी आस्था का अहम केंद्र है। यहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ा मेला लगता है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

सरकार की योजना के मुताबिक घाट पर 5 मीटर चौड़ा स्नान प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। घाट की सीढ़ियां और पटरा लाल पत्थर से तैयार होंगे। यमुना किनारे सुरक्षा मजबूत करने के लिए 30 मीटर लंबाई तक शीट पाइलिंग कराई जाएगी। दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिए हर तीन मीटर पर एंकर बार लगाए जाएंगे। घाट पर पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए करीब 220 मीटर लंबा चैनल भी खोदा जाएगा।

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इसके अलावा अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम हिस्सों में स्लोप पिचिंग का काम होगा, ताकि बरसात और तेज बहाव के दौरान घाट सुरक्षित रहे। मथुरा रेलवे स्टेशन से अक्रूर घाट की दूरी करीब 16 किलोमीटर है, जबकि नए बस स्टैंड से यह लगभग 15 किलोमीटर दूर है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डा पास-पास होने से बाहर से आने वाले यात्रियों को यहां पहुंचने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में ब्रज क्षेत्र को बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। ब्रज की होली, कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी और रंगोत्सव जैसे आयोजनों में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। रंगोत्सव-2026 के मुख्य आयोजनों में 44 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने से ब्रज की लोकप्रियता और बढ़ी है।

इस मान्यता से जुड़ा है अक्रूर घाट

अक्रूर घाट का जिक्र श्रीकृष्ण की कथाओं में भी मिलता है। मान्यता है कि कंस के बुलावे पर जब अक्रूर, कृष्ण और बलराम को लेकर मथुरा जा रहे थे, तब इसी स्थान पर यमुना स्नान के दौरान अक्रूर को भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में दिव्य दर्शन हुए थे। इसके बाद उन्हें विश्वास हुआ कि कृष्ण स्वयं नारायण के अवतार हैं। इसी वजह से यह घाट आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है।

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