
लखनऊ, 31 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज कॉलोनी के सेक्टर-डी में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन अब जिम्मेदारों पर आर्थिक शिकंजा भी कसने जा रहा है। अवैध रूप से निर्मित बहुमंजिला व्यावसायिक भवन को ध्वस्त करने में आए पूरे खर्च की वसूली अब संबंधित भवन स्वामियों से की जाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने ध्वस्तीकरण और मलबा हटाने सहित अन्य कार्यों पर हुए खर्च का आकलन करते हुए 26 लाख 14 हजार 212 रुपये की राशि निर्धारित की है। जल्द ही आरोपी भवन स्वामियों को रिकवरी नोटिस जारी किया जाएगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर अभियंत्रण, विद्युत-यांत्रिक, सुरक्षा और जनसंपर्क अनुभाग ने संयुक्त रूप से ध्वस्तीकरण में हुए खर्च का विस्तृत आकलन तैयार किया। प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने बताया कि वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला और अन्य द्वारा अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित प्लॉट संख्या एमएस-102 पर नियमों के विपरीत व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया गया था। इसी भवन में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली थी।
उन्होंने बताया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश के अनुपालन में 25 जुलाई को अवैध भवन को गिराने की कार्रवाई की गई। इस अभियान में जेसीबी, पोकलैंड, ड्रिल मशीन, डम्पर सहित भारी मशीनरी का उपयोग किया गया। मलबा हटाने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिकों की तैनाती और प्रशासनिक प्रबंधन पर भी पर्याप्त खर्च हुआ, जिसका पूरा वहन एलडीए ने किया।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार प्राधिकरण की नीति के तहत अवैध निर्माण को ध्वस्त करने में आने वाला खर्च संबंधित भवन स्वामी से वसूला जाता है। ध्वस्तीकरण आदेश के दौरान स्थल पर चस्पा की गई नोटिस में भी इस प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर अब भवन स्वामियों को रिकवरी नोटिस भेजा जाएगा।

प्राधिकरण ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर 26.14 लाख रुपये की राशि जमा नहीं कराई गई तो संबंधित भवन स्वामियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए की यह कार्रवाई अवैध निर्माण करने वालों के लिए कड़ा संदेश मानी जा रही है।






