लखनऊ, 24 मई 2026:
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को बड़ा चुनावी संदेश दिया। यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर बुलाई गई इस अहम बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, जनाधार बढ़ाने और सर्वजन हिताय की राजनीति को फिर से जनता के बीच ले जाने पर जोर दिया गया।
बैठक में मायावती के भतीजे आकाश आनंद, आनंद कुमार, सतीश मिश्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यूपी के सभी जिलाध्यक्षों और प्रमुख पदाधिकारियों को भी विशेष रूप से बुलाया गया था। बैठक के दौरान आकाश आनंद द्वारा मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी हैं।
बैठक के बाद जारी पार्टी विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि बदलते राजनीतिक हालात और चुनावी चुनौतियों को देखते हुए बसपा को पहले से अधिक चुस्त, सक्रिय और जमीनी बनना होगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बसपा के पक्ष में माहौल तेजी से बन रहा है और जनता अब छलावे की राजनीति से ऊब चुकी है।

बसपा सुप्रीमो ने बिना किसी दल का नाम लिए विपक्षी पार्टियों और सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं लेकिन सत्ता में आते ही वे वादे भुला दिए जाते हैं। ऐसी विभाजनकारी और स्वार्थी राजनीति ने लोगों का आत्मसम्मान और सम्मानजनक जीवन कठिन बना दिया है।
मायावती ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, नए नियम-कानूनों और आर्थिक दबावों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने सरकारों से रोजगार, रोटी, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत कल्याणकारी नीतियों को ईमानदारी से लागू करें तो जनता को राहत मिल सकती है।
उन्होंने 2007 की बसपा सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति के तहत सभी वर्गों को सम्मान और भागीदारी मिली थी। मायावती ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज समेत कमजोर तबकों को बसपा शासन में उचित सम्मान मिला और प्रदेश में कानून-व्यवस्था का बेहतर माहौल बना था। उन्होंने कहा कि यूपी की जनता को एक बार फिर आजमाई हुई पार्टी और उसके आयरन लेडी नेतृत्व पर भरोसा करना चाहिए।
बैठक में संगठन की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा भी की गई। बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने, सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान करने और मजबूत व जनाधार वाले प्रत्याशियों के चयन को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई। बसपा ने साफ संकेत दिया कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में जुट चुकी है।






