
अनिल निषाद
अयोध्या, 5 अगस्त 2026:
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के करीब दो महीने बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय बुधवार को पहली बार अयोध्या में सार्वजनिक रूप से नजर आए। उन्होंने तपस्वी छावनी मंदिर पहुंचकर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की। हालांकि इस दौरान मीडिया की मौजूदगी उन्हें पसंद नहीं आई। पत्रकारों को फोटो और वीडियो बनाते देख चंपत राय ने नाराजगी जताते हुए उंगली से इशारा कर अपने सहयोगियों से कैमरे बंद कराने को कहा।
मुलाकात के बाद जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने बताया कि उन्होंने चंपत राय से अयोध्या धाम नहीं छोड़ने का आग्रह किया। उनके अनुसार चंपत राय ने भरोसा दिलाया कि उनका कहीं भी आना-जाना हो सकता है लेकिन उनका स्थायी निवास अयोध्या ही रहेगा और वह जीवन की अंतिम सांस तक रामनगरी में ही रहेंगे।
परमहंस आचार्य ने चंपत राय का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि पूरा सनातन समाज उनका सम्मान करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ के चलते चंपत राय का विरोध कर रहे हैं। आचार्य ने कहा कि उनके नेतृत्व में ही भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका इसलिए उन पर लगाए जा रहे आरोप उचित नहीं हैं।

चढ़ावा चोरी में आठ आरोपी हो चुके गिरफ्तार
मालूम हो कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला गत 6 जून को सामने आया था, जिसके बाद जांच शुरू हुई। अब तक इस मामले में पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। विवाद के अगले दिन यानी 7 जून को चंपत राय ने एक वीडियो जारी कर मंदिर में चोरी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि राम मंदिर में किसी प्रकार की चोरी नहीं हुई है। ऐसे में दो महीने बाद उनकी यह सार्वजनिक मौजूदगी और अयोध्या में रहने को लेकर दिया गया संदेश एक बार फिर चर्चाओं का केंद्र बन गया है।






