
अनिल निषाद
अयोध्या, 14 जुलाई 2026:
खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर लोगों के बीच पहचान बनाने वाले एक शख्स को अयोध्या रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ की अयोध्या यूनिट से मिले इनपुट के बाद राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने की। जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से सेना की वर्दी पहनकर अयोध्या और आसपास के इलाकों में घूम रहा था और खुद को अलग-अलग सैन्य पदों पर तैनात अधिकारी बताता था।
लंबे समय से निगरानी में था आरोपी
जांच एजेंसियों के मुताबिक मिलिट्री इंटेलिजेंस को काफी समय से सूचना मिल रही थी कि एक व्यक्ति सेना की अलग-अलग यूनिफॉर्म पहनकर रेलवे स्टेशन, कैंट एरिया और ट्रेनों में नजर आता है। वह लोगों से खुद को आर्टिलरी का अधिकारी बताता था। कई बार वह डोगरा रेजिमेंट में कैंटीन इंचार्ज होने का दावा भी करता था। उसके नाम भी अलग-अलग पता चले। इसी आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई।
तकनीकी जांच में खुली फर्जी पहचान
मिलिट्री इंटेलिजेंस ने तकनीकी साक्ष्यों और दूसरे इनपुट के जरिए उसकी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि वह भारतीय सेना का अधिकारी नहीं है, बल्कि फर्जी पहचान बनाकर सेना की वर्दी और सैन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहा है। इसके बाद उसकी मौजूदगी की सूचना अयोध्या रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को दी गई।
जीआरपी की टीम ने स्टेशन से दबोचा
सूचना मिलते ही जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और सेना की वर्दी पहने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती जांच के दौरान उसके पास मिले पहचान पत्र में नाम करन यादव, पिता उदय भान सिंह यादव और पता गहमर, जिला गाजीपुर दर्ज था।
पूछताछ में सामने आई असली पहचान
कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी की कहानी बदल गई। उसने अपनी असली पहचान सुरेंद्र निषाद, पिता निवासी ग्राम मोहपरिया बलुआ, पकड़ी, चंदौली जिला बताई। दो अलग-अलग पहचान सामने आने के बाद जांच एजेंसियां अब उसके दस्तावेजों और गतिविधियों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
भारी मात्रा में मिला सैन्य सामान
जीआरपी के मुताबिक आरोपी के पास से सेना की कई यूनिफॉर्म, नेम प्लेट, रिबन, सैन्य पहचान से जुड़ा सामान, आधार कार्ड, परिचय पत्र कवर और क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं। बरामद सामान की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्हें कहां से हासिल किया गया और इनका इस्तेमाल किन जगहों पर किया गया।
कई पहलुओं पर जांच जारी
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी केवल फर्जी पहचान बनाकर घूम रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। उसके संपर्क, आवाजाही, इस्तेमाल किए गए दस्तावेज और सैन्य सामान के स्रोत की भी जांच की जा रही है। फिलहाल जीआरपी और मिलिट्री इंटेलिजेंस मामले की संयुक्त जांच में जुटी हैं।






