Uttarakhand

पद्मभूषण से सम्मानित हुए भगत सिंह कोश्यारी… गांव से सियासत तक का सफर बना मिसाल

पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में पद्मभूषण सम्मान से नवाजा, शिक्षा, संगठन और राजनीति में लंबे योगदान के लिए उन्हें देश के बड़े नागरिक सम्मानों में शामिल किया गया

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 25 मई 2026:

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारीi को सोमवार को पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। कोश्यारी को सार्वजनिक जीवन, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में लंबे योगदान के लिए देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा गया।

बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में 17 जून 1942 को जन्मे कोश्यारी ने बेहद साधारण परिवेश से अपनी पहचान बनाई। शुरुआती पढ़ाई पहाड़ के ग्रामीण इलाके में हुई, जिसके बाद उन्होंने अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही वह सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे।

कोश्यारी ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के तौर पर की थी। उन्होंने कासगंज के सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों को पढ़ाया। बाद में वर्ष 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। सीमांत इलाके में शिक्षा को बढ़ावा देने की उस पहल को आज भी याद किया जाता है।

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बनी पहली सरकार में वह कैबिनेट मंत्री रहे। बाद में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। वह राज्यसभा सदस्य रहे, फिर नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट से लोकसभा पहुंचे। सितंबर 2019 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही कुछ समय तक उन्होंने गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।

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