
लखनऊ, 16 जुलाई 2026:
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स-2026 में यूपी ने अपनी समृद्ध हथकरघा परंपरा और तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक वस्त्र उद्योग की ताकत का प्रदर्शन किया। प्रदेश के वस्त्र उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश पारंपरिक बुनकरी की विरासत को आधुनिक औद्योगिक विकास से जोड़कर देश के अग्रणी टेक्सटाइल हब के रूप में तेजी से उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के 5एफ विजन- फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन को आधार बनाकर योगी सरकार निवेश, रोजगार, नवाचार और निर्यात को नई गति दे रही है। टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति और बुनकर कल्याण की योजनाओं ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक टेक्सटाइल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।
राकेश सचान ने कहा कि यूपी सदियों से हथकरघा परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। प्रदेश के करीब 1.91 लाख हथकरघा बुनकर अपनी कला और कौशल से देश-विदेश में पहचान बना रहे हैं। बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही के कालीन, सीतापुर की दरी और मेरठ-बागपत के होम टेक्सटाइल उत्पाद प्रदेश की वैश्विक पहचान बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक उत्पादों के साथ तकनीकी वस्त्र और आधुनिक गारमेंटिंग क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पॉलिसी-2022 के तहत निवेशकों को भूमि लागत में सहायता, स्टांप शुल्क में छूट, पूंजीगत और ब्याज अनुदान समेत कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इससे निवेश और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।

मंत्री ने बताया कि बुनकरों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए बिजली बिल पर सब्सिडी, संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार, आईआईएचटी वाराणसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और अनुसूचित जाति के बुनकरों के लिए विशेष योजनाएं संचालित हैं। मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के जरिए आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से प्रदेश के वस्त्र उद्योग को नई गति मिलेगी। सरकार बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और उद्यमियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए स्टॉल, यात्रा और परिवहन समेत विभिन्न मदों में सहायता दे रही है। राकेश सचान ने कहा कि लक्ष्य बुनकरी की परंपरा को संरक्षित करने के साथ उसे आधुनिक तकनीक, वैश्विक बाजार और निवेश से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।






