
लखनऊ, 20 जुलाई 2026:
यूपी में योजनाओं को कागज से जमीन तक पहुंचाने की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। इसका ताजा उदाहरण मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना है। गत मार्च माह में कैबिनेट से मंजूरी मिलने के चार महीने से भी कम समय में योजना ने प्रदेश के 75 में से 56 जिलों में अपनी दस्तक दे दी है। इन जिलों के ग्रामीण मार्गों पर अब 215 मिनी बसें दौड़ रही हैं। सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य प्रदेश के हर गांव को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत उन गांवों और ग्रामीण मार्गों को बस सेवा से जोड़ा जा रहा है जहां अब तक नियमित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी। इसका उद्देश्य सभी ग्राम पंचायतों को परिवहन सुविधा से जोड़कर ग्रामीणों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक सुरक्षित, सुगम और नियमित आवागमन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही जिन मार्गों पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की बसें सीमित हैं वहां निजी बस संचालकों के सहयोग से परिवहन सेवा शुरू की जा रही है।
परिवहन विभाग के मुताबिक योजना के तहत अब तक 1,012 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 858 आवेदनों का चयन किया जा चुका है। वर्तमान में 56 जनपदों में 215 मिनी बसों का संचालन शुरू हो चुका है। सरकार और परिवहन विभाग चरणबद्ध तरीके से योजना का विस्तार कर रहे हैं जिससे ग्रामीण कनेक्टिविटी का दायरा लगातार बढ़ाया जा सके।
प्रयागराज सबसे आगे, झांसी-मथुरा में भी तेज रफ्तार
बस संचालन के मामले में प्रयागराज सबसे आगे है जहां 43 बसें चल रही हैं। मुजफ्फरनगर में 27, झांसी में 19 और मथुरा में 18 बसों का संचालन शुरू हो चुका है। इसके अलावा जौनपुर में 7, हापुड़ में 6, बांदा और एटा में 5-5, मऊ और जालौन में 4-4 तथा बलिया में 3 बसें संचालित हो रही हैं। अन्य जिलों में भी बसों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है।
सिर्फ सफर नहीं, गांव में रोजगार भी
यह योजना ग्रामीणों को परिवहन सुविधा देने के साथ रोजगार का नया जरिया भी बन रही है। मिनी बसों के संचालन में आवेदक के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बस ड्राइवर और कंडक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है। यानी गांवों को बस सेवा मिलने के साथ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
योजना के तहत 15 से 28 सीटों वाली डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक मिनी बसों को शामिल किया जा सकता है। अधिकतम 8 वर्ष पुरानी बसों को अनुमति होगी। डीजल बसों की अधिकतम आयु 10 वर्ष, जबकि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की आयु 15 वर्ष तय की गई है। एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होगा।
योजना को गति देने के लिए बस संचालन के परमिट की अनिवार्यता से भी छूट दी गई है। आवेदनों की जांच और चयन डीएम की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है। योजना की निगरानी क्षेत्रीय प्रबंधकों के जिम्मे है जो हर महीने मंडलायुक्त को प्रगति रिपोर्ट देंगे। अब सरकार की नजर प्रदेश के उन गांवों पर है जहां अभी भी बस का इंतजार है।






