
लखनऊ, 10 अगस्त 2026:
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक बार फिर ‘योगी की पाती’ लिखी है। इस बार उनकी चिट्ठी में श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारियों का जिक्र किया गया है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति, अनुशासन और लोकजीवन की जीवंत पाठशाला बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रावण की कांवड़ यात्रा हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के सूत्र में जोड़ती है। इस यात्रा में हर व्यक्ति की पहचान एक ही होती है कांवड़िया। भगवा वस्त्र, कंधे पर कांवड़ और हृदय में भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा। पैदल चलने वाले कदम भले अलग हों, लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही रहता है महादेव का जलाभिषेक।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा में जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र और आर्थिक भेद गौण हो जाते हैं। यही कारण है कि यह यात्रा समरसता का महापर्व और सनातन संस्कृति के समभाव का जीवंत उदाहरण बन जाती है।
उन्होंने समुद्र मंथन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने हलाहल विष अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। विष की उष्णता शांत करने के लिए देवताओं ने उनका गंगाजल से अभिषेक किया। इसी परंपरा के कारण श्रावण में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
योगी ने कहा कि कांवड़ यात्रा तप, सेवा, आत्मसंयम और परस्पर सहयोग का संदेश देती है। उन्होंने दिव्यांग शिवभक्तों के कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्साह से यात्रा पूरी करने का उल्लेख करते हुए उनके विश्वास और समर्पण को यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ियों की सम्मानपूर्ण यात्रा के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। यात्रा मार्गों पर पुष्पवर्षा, स्वच्छता, व्यवस्थित शिविर, शुद्ध पेयजल, चिकित्सकीय सहायता, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और नियंत्रण कक्ष से सतत निगरानी की व्यवस्था की गई है। योगी ने श्रद्धालुओं से कांवड़ यात्रा को सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा का उत्सव बनाने की अपील की।
उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल कांवड़ अपनाने और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प लेने को कहा। साथ ही एंबुलेंस या विद्यालय वाहन को रास्ता देने की अपील करते हुए कहा कि छोटी-सी सजगता किसी के लिए बड़ी सहायता बन सकती है। सीएम ने कहा कि श्रद्धा, अनुशासन, संयम और सेवा ही कांवड़ यात्रा की आत्मा हैं और यही भगवान शिव के लोकमंगल का वास्तविक संदेश भी है।






