Uttarakhand

महायोजना 2041: देहरादून की तस्वीर गढ़ने में उमड़े लोग, जनसुनवाई में दिए सुझाव

एमडीडीए का जनसंवाद अभियान सेक्टर-11 राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज सुद्धोवाला में हुआ आयोजित, लोगों ने शहरीकरण के कारण सामने आ रहीं चुनौतियों को बताया, पर्यावरण संतुलन को नजरअंदाज न करने की सलाह

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 21 जुलाई 2026ः

उत्तराखंड के देहरादून को वर्ष 2041 तक सुव्यवस्थित, आधुनिक और संतुलित राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहा जनसंवाद अभियान अब निर्णायक चरण में है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से देहरादून महायोजना 2041 के तहत सेक्टर-11 की जनसुनवाई राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज, सुद्धोवाला में आयोजित हुई। जनसुनवाई में लोगों ने अपने सुझाव व आपत्तियां दर्ज कराईं। एमडीडीए अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया कि प्रत्येक सुझाव को महायोजना के अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

यातायात, आवास व बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर

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जनसुनवाई में लोगों ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण सामने आ रहीं चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। कहा कि आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी को देखते हुए सड़क नेटवर्क के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए। कई नागरिकों ने पार्किंग संकट, आंतरिक संपर्क मार्गों की स्थिति और नए आवासीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सुझाव दिए। लोगों का कहना था कि महायोजना केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रहे, बल्कि अगले दो दशकों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए।

पर्यावरण संरक्षण को मिले प्राथमिकता

लोगों ने हरित क्षेत्रों, प्राकृतिक जल स्रोतों और खुले सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रावधान करने की मांग की। कई ने वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जलभराव की समस्या के समाधान को महायोजना का अभिन्न हिस्सा बनाने की बात कही। लोगों का मानना था कि देहरादून की पहचान उसकी हरियाली और प्राकृतिक संपदा से है, इसलिए विकास की दौड़ में पर्यावरणीय संतुलन को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जनसुनवाई में शामिल तकनीकी विशेषज्ञों ने भी विभिन्न सुझावों को रिकॉर्ड किया और उन्हें योजना निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही।
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स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बने विकास मॉडल

भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग प्रस्तावों, विकास नियंत्रण नियमों और क्षेत्र विशेष की जरूरतों के अनुरूप विकास मॉडल तैयार करने पर जोर दिया। लोगों ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही प्रभावी योजना बनाई जा सकती है। एमडीडीए की टीम ने स्पष्ट किया कि सभी प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का अध्ययन किया जाएगा, ताकि अंतिम महायोजना अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बन सके। एमडीडीए ने बताया कि जनसंवाद अभियान आगे भी जारी रहेगा। सेक्टर-12 की अगली जनसुनवाई 21 जुलाई को सुबह 11 बजे वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट, चंद्रबनी रोड पर आयोजित होगी।

‘जनभागीदारी ही महायोजना की सबसे बड़ी ताकत’

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना 2041 केवल एक तकनीकी दस्तावेज नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य की विकास दृष्टि है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से प्राप्त सुझाव योजना को जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना था कि जितनी अधिक जनभागीदारी होगी, महायोजना उतनी ही प्रभावी और दूरदर्शी बनेगी। एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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