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करोड़ों के लोन व चेक बाउंस मामले में High Court का झटका, राजपाल यादव को 3 माह की जेल

हाईकोर्ट ने एक्टर के रवैये पर जताई नाराजगी, तीन महीने की सजा बरकरार, समझौते के कई मौके मिलने के बाद भी मामला नहीं सुलझा, जुर्माना भी लगाया गया

न्यूज डेस्क, 10 जुलाई 2026:

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने शुक्रवार को Cheque Bounce मामले में उनकी तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखते हुए उन्हें फिर से जेल भेजने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पूरे मामले में एक्टर का रवैया भरोसेमंद नहीं रहा और उन्होंने कई बार दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने उन पर जुर्माना भी लगाया है।

यह विवाद साल 2010 से जुड़ा है। राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, जिसके बाद तय समय पर रकम वापस नहीं चुकाई जा सकी। कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए और मामला अदालत तक पहुंच गया।

इस केस में अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी मानते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को सही माना। इसके बाद राजपाल यादव ने राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट ने जून 2024 में उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए बकाया रकम चुकाने का मौका दिया था। अदालत चाहती थी कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद खत्म कर लें, लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राजपाल यादव अपने वादों पर खरे नहीं उतरे। इसी वजह से अदालत ने पहले उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था और अब सजा को भी बरकरार रखा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि एक्टर की ओर से दिए गए कई बयान पहले की गई अंडरटेकिंग से मेल नहीं खाते। कोर्ट ने साफ कहा कि सवालों के सीधे जवाब नहीं दिए जा रहे हैं और बार-बार अलग-अलग बातें सामने रखी जा रही हैं। इसी आधार पर अदालत ने उनके व्यवहार को संदिग्ध माना।

शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में दलील दी कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में अब वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते और उन्हें अदालत के आदेश का पालन करना होगा।

मामले को खत्म कराने के लिए हाईकोर्ट ने कई बार समझौते की कोशिश भी कराई। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी करीब 6 करोड़ रुपये लेकर पूरा विवाद खत्म करने के लिए तैयार हो गई थी। बाद में अदालत ने 3 करोड़ रुपये तय समय के भीतर जमा कराने का रास्ता भी सुझाया, लेकिन दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद अदालत ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

राजपाल यादव ने अदालत में कहा था कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि बकाया रकम चुकाने के लिए उन्हें अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी और काफी भुगतान भी किया जा चुका है। हालांकि अदालत इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई।
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इस मामले में साल 2025 के आखिर तक सात अलग-अलग मामलों में करीब 9 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया था। हर मामले में उन्हें लगभग 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। राजपाल यादव ने 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया था। बाद में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी। अदालत ने इसके लिए 1.5 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त रखी थी, जिसके बाद 17 फरवरी को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था।

अब शुक्रवार को आए ताजा फैसले के साथ हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि Cheque Bounce मामले में निचली अदालत का फैसला सही था। अदालत ने सजा बरकरार रखते हुए संबंधित अधिकारियों को राजपाल यादव को फिर से जेल भेजने के निर्देश दिए हैं।

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