लखनऊ, 7 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के सशक्तीकरण की चर्चा सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक मजबूती के क्षेत्र में कई योजनाओं के जरिए महिलाओं की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रदेश में अब महिलाएं पहले की तुलना में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ घर से निकल रही हैं और कामकाज में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
मिशन शक्ति बदलाव की अहम कड़ी बना
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शुरू किया गया मिशन शक्ति अभियान इस बदलाव की अहम कड़ी माना जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रदेश भर में एंटी रोमियो स्क्वॉड सक्रिय हैं, जो सार्वजनिक जगहों पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। अब तक 1 करोड़ 18 लाख से ज्यादा स्थानों पर चेकिंग की जा चुकी है और 4 करोड़ 52 लाख से अधिक लोगों की जांच हुई है। इस दौरान 24,871 मुकदमे दर्ज किए गए और 33,268 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को चेतावनी देकर भी छोड़ा गया। सेफ सिटी योजना के तहत 17 नगर निगमों और गौतम बुद्ध नगर में करीब 7 लाख 95 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही 4,150 संवेदनशील स्थान चिन्हित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं के बाद महिलाओं से जुड़े अपराधों में कमी दर्ज की गई है।
महिला पुलिसकर्मियों की बंपर भर्ती
प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत की गई है। अब तक 44 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है। सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाए गए हैं, जहां महिला पुलिसकर्मी शिकायतें सुनती हैं। महिला हेल्पलाइन 1090 और आपातकालीन सेवा 112 को जोड़कर त्वरित मदद की व्यवस्था की गई है। राज्य में 9,172 महिला बीट सक्रिय हैं और करीब 19,839 महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। राजधानी लखनऊ में 100 पिंक बूथ बनाए गए हैं, जहां अब तक 25,216 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 24,659 मामलों का समाधान काउंसिलिंग के जरिए किया गया।
कौशल विकास पर रहा खास जोर
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास पर भी खास जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत युवतियों को आईटी, हेल्थकेयर, फैशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस और रिटेल समेत करीब 35 सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल स्किल, सॉफ्ट स्किल और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि युवतियां आधुनिक रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी
प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। पिछले नौ वर्षों में महिला श्रम भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 9.11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जिनसे 99 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लखपति महिला योजना के तहत 33 लाख से अधिक महिलाओं की पहचान की गई है, जिनमें से 18 लाख से ज्यादा महिलाएं लखपति की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। बीसी सखी योजना के जरिए महिलाओं ने 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन किया है और करीब 109 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है।
सरकारी योजनाओं ने किया संजीवनी का काम
सरकारी योजनाओं का लाभ भी बड़ी संख्या में महिलाओं तक पहुंचा है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.78 लाख बेटियां लाभान्वित हुई हैं, जबकि निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत 38.58 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिल रही है। वन स्टॉप सेंटर से अब तक 2.39 लाख महिलाओं को मदद मिली है। नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 1100 पिंक शौचालय बनाए गए हैं। महिला हेल्पलाइन 181 के जरिए 8.42 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दी गई। हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना के तहत 28.63 लाख महिलाओं और बालिकाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
मनरेगा के तहत भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। वर्ष 2025-26 में मानव दिवस सृजन में महिलाओं की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही और 23.51 लाख महिला श्रमिकों को रोजगार मिला। वहीं 14 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। इस वैक्सीन की कीमत पहले करीब 2100 रुपये थी, जिसे घटाकर लगभग 300 रुपये तक लाया गया है।






