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नकली दवाओं के नेटवर्क पर शिकंजा : लखनऊ में 8.87 करोड़ की फर्जी खरीद का खेल, चार पर FIR

अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट में बिना दवा सप्लाई के बिलिंग और कागजी लेनदेन का खुलासा, 39.20 लाख Zoryl M1 का नहीं मिला हिसाब, आगरा से राजस्थान और देहरादून तक जुड़े तारों की जांच

लखनऊ, 13 अगस्त 2026:

नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे अभियान में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने लखनऊ में एक और बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। अमीनाबाद में कथित तौर पर बिना वास्तविक दवा की आपूर्ति किए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाने का मामला सामने आया है। जांच के आधार पर चार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

एफआईआर में हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर स्थित पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक ऐजाज अहमद को आरोपी बनाया गया है। एफएसडीए के अनुसार इन फर्मों के बीच कथित तौर पर बिना वास्तविक दवा सप्लाई के बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाकर दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

बिना लाइसेंस कारोबार और एक ही फ्लोर पर दो फर्म

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जांच में अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस की भूमिका भी सामने आई है। विभाग के मुताबिक फर्म के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी ने वैध औषधि लाइसेंस के बिना दवाओं के भंडारण और लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार किया। जांच में गोविंद शुक्ला को भी फर्म के प्रमुख कर्ताधर्ताओं में शामिल बताया गया है।

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एफएसडीए के अनुसार हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर पर संचालित हो रहे थे। आरोप है कि इनके जरिए दवाओं के अवैध डायवर्जन और कागजी लेनदेन का नेटवर्क चलाया जा रहा था। वहीं सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस करीब दो वर्षों से बंद बताई गई लेकिन कथित तौर पर इसका इस्तेमाल फर्जी खरीद और कागजी रोटेशन के लिए किया गया।

8.87 करोड़ की खरीद, लाखों दवाओं का हिसाब नहीं

जांच में एमके फार्मा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभाग के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026 में फर्म ने करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई। दस्तावेजों में Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup जैसी दवाओं की खरीद अन्य फर्मों के नाम पर दर्शाई गई थी।

विभाग का दावा है कि निर्माताओं और संबंधित फर्मों से सत्यापन कराने पर इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया गया। संबंधित बैचों को कथित तौर पर काउंटरफिट बताया गया। जांच के दौरान साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा डिलीट किए जाने की बात भी सामने आई। सबसे चौंकाने वाला तथ्य Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख दवाओं का हिसाब नहीं मिलना है। एफएसडीए को आशंका है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि दवाओं की वास्तविक सप्लाई कहां हुई और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

लखनऊ के बाद आगरा और दूसरे राज्यों तक पहुंची जांच

नकली दवाओं के खिलाफ अभियान में आगरा में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई सामने आई है। विभाग के अनुसार कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट में कार्रवाई के दौरान 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज की गईं। कथित तौर पर फर्जी बिलों के जरिए नकली Chymoral Forte और Aciloc की बिक्री तथा ESI और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी के मामले पकड़े गए।

आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली और सरकारी एवं डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त किए जाने की बात विभाग ने कही है। मई में एक अवैध गोदाम से करीब 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की इंसुलिन, वैक्सीन और अन्य दवाएं बिना आवश्यक कोल्ड-चेन के रखी मिली थीं। करीब 50 लाख रुपये की नकली Oxalgin DP भी जब्त की गई थी।

राजस्थान और देहरादून तक खंगाले जा रहे तार

एफएसडीए अब इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रहा है। अमीनाबाद के एक अवैध गोदाम से बरामद नकली दवाओं का स्रोत राजस्थान तक पहुंचने की बात सामने आई है। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। देहरादून में कथित तौर पर नकली दवाएं तैयार करने वाली अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है।

लाइसेंस रद्द होंगे, एजेंट भी निगरानी में

आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। लक्ष्य नकली, अमानक, री-लेबल और अवैध दवाओं की सप्लाई चेन को उसके स्रोत तक पहुंचकर खत्म करना है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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