
लखनऊ, 13 अगस्त 2026:
संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Bill) को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजे जाने के फैसले ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि संसद में जनहित से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ हावी है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत पोस्ट में कहा कि सरकार FCRA संशोधन बिल को बेहद महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह इसे भी जल्द पारित कराना चाहती थी। लेकिन विपक्ष के जबरदस्त विरोध के चलते बिना प्रारंभिक चर्चा के ही विधेयक को जल्दबाजी में JPC के पास भेज दिया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस बिल को सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेशी फंडिंग के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए नियमों को और कठोर बनाने की पैरवी कर रही है। मायावती के मुताबिक पूरे घटनाक्रम से साफ है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने FCRA बिल का जरूरत से ज्यादा राजनीतिकरण कर दिया है।
बसपा प्रमुख ने विपक्ष के संसद न चलने देने के रवैये पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि विपक्ष को विधेयक सदन में रखे जाने देना चाहिए था। उसकी कमियों को उजागर करना चाहिए था जिससे देश की जनता भी पूरे मामले को समझ पाती। उन्होंने आरोप लगाया कि हंगामे के कारण कई दूसरे विधेयक भी सरकार ने कुछ ही मिनटों में पारित करा लिए और विपक्ष उन्हें प्रभावी ढंग से रोक नहीं सका।
मायावती ने यहां तक कहा कि इससे विपक्ष की ‘आंतरिक मिलीभगत’ का संदेह पैदा होता है या फिर Gen Z के वोटों की राजनीति में वह अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने विपक्ष को Gen Z की समस्याओं के साथ-साथ व्यापक जनहित के मुद्दों को भी प्राथमिकता देने की नसीहत दी।

बसपा सुप्रीमो ने अयोध्या स्थित राममंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों का मुद्दा संसद में उठाए जाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस विषय को पीछे कर दिया जबकि इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।
अंत में मायावती ने जनता से सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान से सचेत रहने की अपील करते हुए बसपा को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली पार्टी बताया और देश व आमजनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने को समय की मांग करार दिया।






