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‘गोबरधन’ योजना : गोबर से गैस तक, ₹23,731 करोड़ से बदलेगी गांवों की अर्थव्यवस्था

10 साल में CBG उत्पादन 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य, किसानों से लेकर उद्यमियों तक को मिलेगा फायदा, नई योजना में खरीद की गारंटी, पूंजी सहायता और क्रेडिट गारंटी का सहारा

न्यूज डेस्क, 7 अगस्त 2026:

गोबर, पराली, गन्ने का प्रेसमड और शहरों के जैविक कचरे को अब सिर्फ कचरा नहीं अपितु ऊर्जा और कमाई के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 6 अगस्त को केंद्रीय कैबिनेट ने गोबरधन- नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम को मंजूरी दे दी। ₹23,731 करोड़ के कुल बजट वाली यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी। सरकार का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन करीब 10 गुना बढ़ाना है।

इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि यह केवल बायोगैस प्लांट लगाने तक सीमित नहीं है। फीडस्टॉक जुटाने से लेकर गैस के उत्पादन, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, खरीद, कीमत और वित्तीय सहायता तक पूरी वैल्यू चेन को एकीकृत किया गया है।

किसान से लेकर बड़े उद्योग तक को मौका

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गोबरधन का सीधा लाभ आम नागरिक को किसी सब्सिडी या नकद सहायता के रूप में नहीं मिलेगा। यह मुख्य रूप से CBG प्लांट लगाने वाले उद्यमियों, कंपनियों, MSME, सहकारी समितियों और FPOs के लिए व्यावसायिक अवसर पैदा करने वाली योजना है।

किसानों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गोबर और कृषि अवशेष CBG प्लांट के लिए बिकने वाली सामग्री बनेंगे। यानी पराली जलाने के बजाय किसान उसे बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। वहीं प्लांट से निकलने वाली जैविक खाद का इस्तेमाल खेतों में किया जा सकेगा।
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चीनी मिल, राइस मिल और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयां भी अपने अपशिष्ट को CBG उत्पादन में इस्तेमाल कर सकती हैं। महिला उद्यमियों और पहली बार इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले छोटे डेवलपर्स को क्रेडिट गारंटी व्यवस्था से विशेष मदद मिलने की उम्मीद है।

छह ‘ग्रोथ इंजन’ देंगे योजना को रफ्तार

गोबरधन योजना छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।
पहला-गारंटीशुदा खरीद। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए CBG दायित्व तय किया गया है। यह 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% होगा। इससे उत्पादकों को गैस बेचने के लिए निश्चित बाजार मिलेगा।

दूसरा-स्थिर कीमत। CBG के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU का प्रशासित मूल्य ढांचा प्रस्तावित है, जिसे कम से कम 10 वर्षों तक स्थिर रखने का उद्देश्य है।

तीसरा-पूंजीगत सहायता। पात्र ग्रीनफील्ड CBG परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के हिसाब से प्रति TPD ₹2 करोड़ तक पूंजीगत सहायता मिल सकती है। ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के लिए भी सहायता का प्रावधान है।

चौथा-पाइपलाइन कनेक्टिविटी। CBG प्लांट को ट्रंक पाइपलाइन और CGD नेटवर्क से जोड़ने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे गैस की ढुलाई लागत घटेगी।

पांचवां-क्रेडिट गारंटी। MSME, महिला उद्यमियों और नए डेवलपर्स के लिए बैंक ऋण लेना आसान बनाने के उद्देश्य से क्रेडिट गारंटी तंत्र तैयार किया जाएगा।

छठा-चैलेंज फंड। जिला स्तर पर फीडस्टॉक मैपिंग, एग्रीगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीक, जैविक खाद की वैल्यू एडिशन और स्थानीय क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।

कितना खर्च आएगा

CBG प्लांट की लागत उसकी क्षमता, तकनीक, फीडस्टॉक और स्थान पर निर्भर करेगी। उद्योग के अनुमान के मुताबिक कुल परियोजना लागत लगभग ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ प्रति TPD तक हो सकती है। मसलन, 10-20 TPD क्षमता वाले प्लांट की लागत ₹50 करोड़ या उससे अधिक भी हो सकती है।

हालांकि, ये इंडस्ट्री अनुमान हैं। सरकार की निर्धारित लागत नहीं। अंतिम निवेश से पहले विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन जरूरी होगा। गोबरधन की पूंजीगत सहायता शुरुआती निवेश का बोझ कम कर सकती है। इसके साथ क्रेडिट गारंटी और सुनिश्चित खरीद से बैंक तथा निवेशकों के लिए परियोजना का जोखिम भी घटने की उम्मीद है।

आवेदन कैसे होगा

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 6 अगस्त 2026 को कैबिनेट मंजूरी मिलने के बाद फिलहाल इस नई योजना के लिए अलग से आवेदन पोर्टल या विस्तृत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।
इसलिए अभी किसी वेबसाइट पर जाकर ‘गोबरधन 2026’ के नाम से आवेदन करने या शुल्क जमा करने से बचना चाहिए। योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश, पात्रता, आवेदन पोर्टल, परियोजना चयन और सहायता जारी करने की प्रक्रिया संबंधित मंत्रालय द्वारा अलग से अधिसूचित की जानी है।

ध्यान रहे कि 2018 से चल रही जल शक्ति मंत्रालय की गोबरधन पहल और नई ₹23,731 करोड़ वाली पेट्रोलियम मंत्रालय की CBG योजना अलग हैं। दोनों को एक ही योजना समझना सही नहीं होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया बाजार
गोबरधन की असली ताकत केवल गैस उत्पादन नहीं, बल्कि उसके आसपास बनने वाली पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था है। फीडस्टॉक संग्रह, परिवहन, प्लांट संचालन, जैविक खाद निर्माण और स्थानीय सेवाओं में रोजगार के अवसर बन सकते हैं। साथ ही पराली जलाने और जैविक कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

भारत में प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा आयात की जाती है। ऐसे में घरेलू कचरे और कृषि अवशेषों से बनने वाली CBG ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब चुनौती यह है कि घोषित सहायता समय पर जमीन पर उतरे, प्लांटों को पर्याप्त फीडस्टॉक मिले और खरीद तथा मूल्य व्यवस्था वास्तव में निवेशकों के लिए भरोसेमंद साबित हो।

गोबरधन की सफलता का पैमाना सिर्फ कितने प्लांट बने, यह नहीं होगा। असली सफलता तब होगी जब खेत का अवशेष किसान की आय, गांव का कचरा ऊर्जा और देश की ऊर्जा जरूरत का घरेलू स्रोत बन जाए।

एक नजर में गोबरधन योजना

कुल बजट : ₹23,731 करोड़
अवधि : 2026-27 से 2035-36
कुल अवधि : 10 वर्ष
नोडल मंत्रालय : पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
मुख्य लक्ष्य : CBG उत्पादन में करीब 10 गुना वृद्धि
पूंजीगत सहायता : पात्र परियोजनाओं के लिए ₹2 करोड़ प्रति TPD तक
CBG दायित्व : 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4%, 2028-29 से 5%
प्रशासित मूल्य : ₹2,110 प्रति MMBTU
मुख्य लाभार्थी : CBG डेवलपर्स, MSME, FPO, सहकारी समितियां, किसान और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयां

आवेदन से पहले रखें ध्यान

अभी नई गोबरधन योजना का अलग आवेदन पोर्टल जारी नहीं हुआ है। योजना को 6 अगस्त 2026 को कैबिनेट की मंजूरी मिली है। पूरी गाइडलाइन, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और सहायता वितरण के नियम संबंधित मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने हैं।
किसान : फीडस्टॉक सप्लायर के रूप में जुड़ सकते हैं।
उद्यमी : CBG प्लांट लगाने के अवसर तलाश सकते हैं।
MSME/FPO : क्रेडिट गारंटी और वित्तीय सहायता व्यवस्था से लाभ की संभावना।
निवेशक : सुनिश्चित खरीद और मूल्य ढांचे से परियोजनाओं में निवेश का अवसर।
सावधानी : किसी अनधिकृत वेबसाइट या एजेंट को ‘गोबरधन 2026 आवेदन’ के नाम पर शुल्क न दें।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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