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अब टेलीग्राम पर नहीं चलेगी ‘फ्री फिल्म’ की दुकान! सरकार का 15 दिन का अल्टीमेटम

पायरेटेड फिल्में-वेब सीरीज हटाने की हिदायत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का सख्त नोटिस, 3,000 से ज्यादा पायरेसी चैनलों पर पहले ही कार्रवाई, अब प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की तैयारी

न्यूज डेस्क, 5 जुलाई 2026:

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर मुफ्त में उपलब्ध पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज अब जल्द ही बीते दिनों की बात हो सकती हैं। केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को कड़ा नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर सभी पायरेटेड कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही चेतावनी दी है कि आदेश की अनदेखी, टाल-मटोल या अधूरे जवाब की स्थिति में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम से 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। यह तीन दिनों के भीतर भेजा गया दूसरा नोटिस है। इससे पहले 2 जुलाई को मंत्रालय ने टेलीग्राम से उसके यूजरनेम फीचर और यूजर्स की निजता से जुड़े कई सवालों के जवाब तलब किए थे।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिल्मों और वेब सीरीज की पायरेसी केवल सिविल उल्लंघन नहीं बल्कि कॉपीराइट एक्ट 1957 और सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के तहत गंभीर अपराध है। सरकार का कहना है कि टेलीग्राम केवल इस इंतजार में नहीं बैठ सकता कि सरकार एक-एक कर पायरेसी वाले चैनलों की पहचान कराए। एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के तौर पर प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वह स्वयं ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

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सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह कदम पायरेटेड सामग्री को टुकड़ों में हटाने के बजाय प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की नई नीति का संकेत है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अब तक पायरेटेड सामग्री प्रसारित करने वाले 3,000 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म इंडस्ट्री, ब्रॉडकास्टर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के हितों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। मंत्रालय ने टेलीग्राम से निर्माताओं, ओटीटी कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए उपलब्ध शिकायत निवारण तंत्र का पूरा विवरण भी मांगा है।

मंत्रालय ने साफ किया है कि टेलीग्राम को आईटी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2021 के तहत निर्धारित उचित तत्परता (ड्यू डिलिजेंस) का पालन करना होगा। यदि पायरेटेड सामग्री लगातार उपलब्ध रहती है या नियमों के अनुपालन में लापरवाही पाई जाती है तो कंपनी के खिलाफ आगे की जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसी क्रम में सरकार व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के विभिन्न फीचर्स और नियमों के पालन की भी समीक्षा कर रही है।

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