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जेलों में बढ़ता कट्टरपंथ बना आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा, गृह मंत्रालय ने दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली, 14 जुलाई 2025

देशभर की जेलों में बढ़ते कट्टरपंथी रुझानों को गंभीर चुनौती मानते हुए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर सतर्कता बरतने और सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने जेलों में मौजूद सामाजिक अलगाव और कमजोर निगरानी को कट्टरपंथ के पनपने का कारण बताया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे कुछ कैदी हिंसा की योजना बना सकते हैं, जो जेल कर्मचारियों, अन्य कैदियों या बाहरी व्यक्तियों पर हमले का कारण बन सकता है।

पत्र में गृह मंत्रालय ने दस महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है, जिनमें तत्काल प्रभाव से लागू की जाने वाली व्यवस्थाएं शामिल हैं। इनमें उच्च जोखिम वाले कैदियों की पहचान कर उन्हें सामान्य कैदियों से अलग रखने, व्यवहार के आधार पर विचारधारा की पहचान करने वाली प्रणाली विकसित करने, और समय-समय पर मूल्यांकन की प्रक्रिया शामिल है।

साथ ही मंत्रालय ने जेलों को केवल दंड स्थल न मानते हुए सुधार केंद्र बनाने पर जोर दिया है। पत्र में मानसिक, सामाजिक और स्वास्थ्य मूल्यांकन के जरिए कैदियों की स्क्रीनिंग को जरूरी बताया गया है। कट्टरपंथ से निपटने के लिए काउंसलिंग, शिक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने की बात कही गई है।

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पत्र में यह भी कहा गया है कि जेलों में निगरानी उपकरणों और खुफिया नेटवर्क को मजबूत किया जाए। उच्च सुरक्षा वाले विशेष जेल परिसर बनाने पर भी विचार करने को कहा गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेल से छूटने के बाद कैदी समाज से दोबारा जुड़ सके, इसके लिए एक फॉलोअप निगरानी सिस्टम जरूरी है।

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से अपील की है कि वे इस दिशा में ठोस और व्यावहारिक योजना बनाकर कट्टरपंथ की मानसिकता को बदलने का प्रयास करें ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक शांति को मजबूत किया जा सके।

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