लखनऊ/नोएडा, 26 मार्च 2026:
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। 28 मार्च को प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करेंगे। यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला बड़ा इंजन माना जा रहा है।
बता दें कि जेवर एयरपोर्ट को भविष्य में बड़े इंटरनेशनल हब के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित पांच रनवे के साथ यह एयर ट्रैफिक का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर दबाव भी कम होगा और भारत की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजना के तहत तैयार यह एयरपोर्ट प्रदेश के व्यापार, खेती, उद्योग और पर्यटन को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ेगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बताया जा रहा है। इसकी सालाना क्षमता करीब 7 करोड़ यात्रियों और लगभग 10 लाख टन कार्गो संभालने की होगी। इससे सबसे बड़ा फायदा कृषि और छोटे उद्योगों को मिलने की उम्मीद है।

किसानों के लिए खुलेगा विदेशी बाजार
एयरपोर्ट की कार्गो सुविधा शुरू होने के बाद फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और फूल जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान सीधे विदेश भेजे जा सकेंगे। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। जानकारों का कहना है कि इससे किसानों की आय में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
जीडीपी पर दिखेगा असर
बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली-एनसीआर के साथ आगरा, मथुरा, वृंदावन और वाराणसी जैसे शहरों तक पहुंच आसान होगी। इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। एयरपोर्ट पूरी क्षमता से चलने पर प्रदेश की जीडीपी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त संभव मानी जा रही है।
रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा
एयरपोर्ट के शुरू होते ही रोजगार के नए अवसर बनेंगे। शुरुआती पांच साल में एयरपोर्ट संचालन, सुरक्षा, ग्राउंड हैंडलिंग और हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टर में करीब 50 हजार प्रत्यक्ष नौकरियां मिलने का अनुमान है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, होटल, सप्लाई चेन और एमएसएमई सेक्टर में लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
रियल एस्टेट और उद्योग को रफ्तार
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से विकास देखने को मिलेगा। नए होटल, वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस और इंडस्ट्रियल यूनिट्स स्थापित होंगी। बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा तक शहरी विस्तार बढ़ेगा, जिससे नए टाउनशिप विकसित होंगे।
लॉजिस्टिक्स हब बनने की तैयारी
एयरपोर्ट की लोकेशन इसे लॉजिस्टिक्स के लिहाज से अहम बनाती है। ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर के करीब होने के साथ यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधा कनेक्शन मिलेगा। इससे माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी। देश में जहां लॉजिस्टिक्स लागत 13 से 14 प्रतिशत तक रहती है, उसमें कमी आने की उम्मीद है।
निवेशकों की बढ़ेगी दिलचस्पी
एयरपोर्ट के आसपास एयरोसिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित हो रहे हैं। इससे देशी और विदेशी कंपनियों का रुझान बढ़ेगा। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश की संभावना मजबूत हुई है।






