
लखनऊ, 13 जुलाई 2026:
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 22वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डॉक्टरों से कहा कि Artificial Intelligence स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा सक्षम बना सकता है, लेकिन मरीज के मन में भरोसा नहीं जगा सकता। जब कोई मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है तो उसे सिर्फ दवा नहीं, भरोसे की भी जरूरत होती है। यह भरोसा किसी मशीन से नहीं बल्कि संवेदनशील और करुणामय डॉक्टर से मिलता है। इसलिए चिकित्सा पेशे में ज्ञान के साथ संवेदना और सेवा भाव सबसे बड़ी ताकत है।
दवा के साथ व्यवहार में भी हो हीलिंग
राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉक्टर की लिखी दवा जितनी जरूरी होती है, उतना ही उसका व्यवहार भी मरीज पर असर डालता है। कई मरीज डॉक्टर को देखते ही घबरा जाते हैं, जिसे व्हाइट कोट सिंड्रोम कहा जाता है। ऐसे में डॉक्टर का शांत और भरोसा देने वाला व्यवहार मरीज की आधी परेशानी कम कर देता है। उन्होंने कहा कि इलाज सिर्फ Patient Care तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि Caring for the Patient की भावना भी हर डॉक्टर के काम का हिस्सा बननी चाहिए।
भारतीय परंपरा में डॉक्टर को मिला ईश्वर का दर्जा
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में चिकित्सक को ईश्वर का स्वरूप माना गया है। हर सफल इलाज सिर्फ एक मरीज को स्वस्थ नहीं करता बल्कि देश की Human Capital को भी मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए डॉक्टरों को हर मरीज के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
रामायण से दिया सेवा का संदेश
राजनाथ सिंह ने रामचरित मानस का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजवैद्य सुषेन ने लक्ष्मण का इलाज करते समय यह नहीं देखा कि वह किस पक्ष से हैं। एक डॉक्टर का धर्म केवल मरीज का इलाज करना होता है। उन्होंने मशहूर दार्शनिक वाल्टेयर का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन बचाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना जीवन देना। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज के दौरान ध्यान और मेडिटेशन को भी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने ब्रिटिश चिकित्सक सर विलियम ऑसलर के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि मरीज की बात ध्यान से सुनना भी इलाज का अहम हिस्सा होता है। कई बार बीमारी की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी मरीज खुद अपनी बातों में बता देता है।
Health System की बदलती तस्वीर का किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का Health System तेजी से बदल रहा है। Affordable Healthcare, स्वदेशी Medical Technologies, Gene Therapy, CAR-T Cell Therapy और Medical Research जैसे क्षेत्रों में देश लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अंगदान को मानवता का सबसे बड़ा उपहार बताते हुए कहा कि लोगों में जागरूकता फैलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी डॉक्टरों की है।
बृजेश पाठक बोले, पहले इलाज फिर कागजी प्रक्रिया
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि किसी भी मरीज के अस्पताल पहुंचने के शुरुआती दो से पांच मिनट सबसे ज्यादा अहम होते हैं। ऐसे समय डॉक्टर और अस्पताल का पूरा ध्यान मरीज को तुरंत इलाज देने पर होना चाहिए। पर्चा, रजिस्ट्रेशन और दूसरी औपचारिकताएं बाद में भी पूरी की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर Medical Education, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और लगातार मजबूत होती स्वास्थ्य सुविधाओं की वजह से उत्तर प्रदेश की पहचान पूरे देश में मजबूत हुई है। उन्होंने नए डॉक्टरों से कहा कि समाज उन्हें धरती पर ईश्वर का रूप मानता है, इसलिए मानवता की सेवा को हमेशा प्राथमिकता दें।

दीप्ति शर्मा ने जीते सबसे ज्यादा 18 मेडल
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कुल 20 विद्यार्थियों को 54 स्वर्ण और अन्य पदक दिए गए। समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण दीप्ति शर्मा रहीं, जिन्होंने अकेले 18 पदक अपने नाम किए। उन्हें प्रतिष्ठित हीवेट गोल्ड मेडल और चांसलर गोल्ड मेडल समेत कई बड़े सम्मान दिए गए। करीब 1700 छात्रों को उपाधि दी गई।

राज्यपाल समेत कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
समारोह को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी संबोधित कर मेडल दिए। कार्यक्रम में राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद, प्रति कुलपति प्रो. अंजू अग्रवाल, डीन प्रो. अमिता पांडेय, प्रो. वीरेंद्र आतम, प्रो. जीके सिंह, प्रो. केके सिंह, प्रो. राजीव गर्ग, प्रो. हरदीप मल्होत्रा, रजिस्ट्रार अर्चना गहरवार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र और बड़ी संख्या में अतिथि मौजूद रहे।







