लखनऊ, 4 अगस्त 2026:
रिश्वतखोरी के मामले में अवर अभियंता (जेई), सुपरवाइजर और एक बिचौलिये की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भ्रष्टाचार के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार शुरू किया है। एलडीए ने शहर में निर्माण कार्यों को अवैध बताकर आईजीआरएस और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायत करने वाले टॉप-50 पेशेवर शिकायतकर्ताओं की सूची उनके नाम और मोबाइल नंबर सहित उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) को सौंप दी है। इसके साथ ही जांच में तेजी लाने के लिए एलडीए उपाध्यक्ष ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है।
एलडीए दफ्तर पहुंची विजिलेंस टीम ने मांगी ये जानकारी
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक एलडीए कार्यालय पहुंची विजिलेंस टीम ने पूरे प्रकरण से जुड़ी आईजीआरएस पत्रावलियां और अन्य दस्तावेज मांगे थे। इस पर सचिव विवेक श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी 24 घंटे के भीतर जांच एजेंसी को सभी जरूरी अभिलेख और सूचनाएं उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार या किसी भी अनर्गल गतिविधि में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। रिश्वत प्रकरण में गिरफ्तार प्रवर्तन जोन-5 के पंप ऑपरेटर (सुपरवाइजर) चंद्र प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आरोपी अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा के निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा गया है।

अवैध निर्माण की शिकायतों पर बिना जांच कार्रवाई नहीं
एलडीए ने प्रवर्तन अनुभाग में तैनात सभी अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों के लिए नई एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि आईजीआरएस या अन्य माध्यमों से मिलने वाली अवैध निर्माण की शिकायतों पर बिना पर्याप्त जांच के कार्रवाई न की जाए। प्राधिकरण का मानना है कि लगातार शिकायत करने वाले कुछ पेशेवर शिकायतकर्ता जांच के दायरे में हैं, इसलिए उनकी सूची भी विजिलेंस को सौंप दी गई है।
भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क का होगा खुलासा
जांच का दायरा केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा। विजिलेंस ने घटना वाले दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज भी मांगी है। इसके अलावा पिछले एक महीने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है जिससे प्रवर्तन अनुभाग के आसपास सक्रिय बिचौलियों और संदिग्ध तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके। एलडीए अधिकारियों का मानना है कि इस जांच से भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।






