
लखनऊ, 24 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज कॉलोनी स्थित पुरनिया चौराहे के पास तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद आखिरकार जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार चलने का नंबर आ ही गया। इस हादसे से घिरे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार तत्कालीन विहित प्राधिकारी समेत 18 इंजीनियरों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। इसके साथ एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने विस्तृत जांच के बाद सभी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेज दी है।

उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मामले से जुड़ी हर फाइल की स्वयं जांच की। उन्होंने यह पता लगाया कि संबंधित भूखंड का आवंटन कब हुआ, रजिस्ट्री कब हुई, मानचित्र कब स्वीकृत किया गया और अवैध निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी निभाने में किन अधिकारियों ने लापरवाही बरती। जांच में सामने आया कि जिस भवन का मानचित्र केवल एकल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था वहां वर्षों तक बहुमंजिला व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रहीं।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो प्रभावी निगरानी की और न ही मानचित्र उल्लंघन रोकने के लिए कोई ठोस प्रवर्तन कार्रवाई की। जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव की भूमिका सबसे गंभीर पाई गई। अभिलेखों के अनुसार उन्होंने वर्ष 2016 में भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया था, लेकिन बाद में निर्माणकर्ता के प्रार्थना पत्र पर वही आदेश निरस्त कर दिया।
रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि आदेश समाप्त करने के बाद भवन की वास्तविक स्थिति, उपयोग और मानचित्र अनुपालन की दोबारा जांच क्यों नहीं कराई गई। एलडीए की रिपोर्ट में प्रवर्तन जोन-4 में तैनात रहे पांच जोनल अधिकारियों, छह सहायक अभियंताओं और सात अवर अभियंताओं की भी लापरवाही उजागर हुई है।
इन अधिकारियों व इंजीनियरों के खिलाफ शासन को भेजी गई रिपोर्ट
शासन को भेजी गई रिपोर्ट में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव के अलावा अधिशासी अभियंता अवनीन्द्र सिंह, बीपी मौर्या, पीसी पांडेय और आनंद मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं सहायक अभियंता सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आरएस सिंह, अनिल कुमार और संजय शुक्ला तथा अवर अभियंता जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पाण्डेय, अम्बरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला और निलंबित हेमंत कुमार को भी जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। 15 जिंदगियां निगलने वाले इस अग्निकांड के बाद एलडीए की यह कार्रवाई अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ा सवाल भी खड़ा करती है।






