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लखनऊ नवाबों का नहीं, भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण का नगर… कथा के दौरान बोले रामभद्राचार्य

सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई में आयोजित नौ संगीतमय श्रीराम कथा में भगवान के अवतारों की महिमा का किया वर्णन, संविधान और भारत की सांस्कृतिक पहचान पर रखे विचार

लखनऊ, 3 जून 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भगवान के अवतारों की महिमा, धर्म की स्थापना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान उनके विचारों और भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

रामभद्राचार्य ने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म, अनीति और अन्याय बढ़ता है तब भगवान सज्जनों की रक्षा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार भी इसी उद्देश्य से हुआ था। उनके अनुसार भगवान राम का जीवन केवल अयोध्या के राजकुमार का जीवन नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आदर्श, मर्यादा और प्रेरणा का प्रतीक है।

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कथा के दौरान उन्होंने भगवान के विभिन्न अवतारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर अवतार का उद्देश्य समाज को नई दिशा देना, आसुरी शक्तियों का विनाश करना और दैवीय मूल्यों की स्थापना करना रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान भी किया।

लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान पर चर्चा करते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि यह नगर नवाबों का नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के अनुज कुमार लक्ष्मण का नगर है। उन्होंने कहा कि बड़े मंगल की परंपरा और शहरभर में लगने वाले विशाल भंडारे इस बात का प्रमाण हैं कि लखनऊ की धार्मिक पहचान भगवान लक्ष्मण से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण लखनऊ देश में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने भारतीय संविधान को लेकर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संविधान में प्रयुक्त इंडिया दैट इज भारत के स्थान पर भारत दैट इज इंडिया होना चाहिए था। इसके साथ ही उन्होंने स्वयंभू मनु को प्रथम संविधान निर्माता बताते हुए मनुस्मृति का उल्लेख किया।

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अपने विशिष्ट अंदाज में रामभद्राचार्य ने कई भजनों की प्रस्तुति भी दी। हमनी के धन एगो राघव के चरण बा, अब तो स्वयंभू मनु को अवतारी चाहिए और शंकर तू ले ल कैलाश, हम त भारते रहबे जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। संगीत मंडली की प्रभावी संगत ने कथा को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

कथा सुनने के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, आयोजन से जुड़े स्थानीय भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा, एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, लोकगायिका मालिनी अवस्थी, ब्रजकिशोर गुप्ता सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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