
लखनऊ, 25 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित बहुमंजिला भवन में हुए भीषण अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शहर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब एकल आवासीय (लो-राइज) भवनों को छोड़कर सभी आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों के मानचित्र स्वीकृत कराने से पहले भवन स्वामी को अग्नि सुरक्षा व्यवस्था संबंधी नोटरीकृत शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार जिन भवनों के लिए अग्निशमन विभाग की एनओसी अनिवार्य नहीं है, उनमें न्यूनतम फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इसके लिए भवन स्वामी अथवा आवेदक को निर्धारित प्रारूप पर नोटरी से प्रमाणित शपथ पत्र जमा करना होगा।
एलडीए मुख्यालय में इन शपथ पत्रों के लिए अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसकी साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट एलडीए सचिव के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। उपाध्यक्ष ने सभी जोनल अधिकारियों को शहर में व्यापक जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से उन भवनों की जांच होगी जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है।
जांच के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था, बेसमेंट के उपयोग और पार्किंग व्यवस्था का सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही भवन स्वामियों से इस संबंध में शपथ पत्र भी लिया जाएगा। एलडीए ने बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं, कोचिंग सेंटरों, जिम, होटलों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स और अन्य भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों की विशेष जांच के निर्देश दिए हैं।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्मित भवनों, बेसमेंट के अवैध उपयोग और फायर सेफ्टी मानकों का पालन न करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा ऐसे भवनों को भी चिन्हित किया जाएगा जिनका मानचित्र आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था लेकिन उनमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
एलडीए के अनुसार मास्टर प्लान के विपरीत उपयोग पाए जाने पर संबंधित भवन स्वामियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अलीगंज अग्निकांड के बाद शुरू हुई यह मुहिम राजधानी में फायर सेफ्टी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।






