
एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 4 अगस्त 2026:
यूपी में भूमि विवादों के समाधान की दिशा में राजस्व विभाग ने तकनीक का बड़ा सहारा लिया है। अब खेतों की पैमाइश पारंपरिक तरीकों से नहीं अपितु अत्याधुनिक रोवर (Rover) तकनीक के जरिए कुछ सेंटीमीटर की सटीकता के साथ की जाएगी। इसकी शुरुआत मोहनलालगंज तहसील के करोरवा गांव से हुई, जहां प्रदेश के राजस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेंद्र सिंह दिलेर ने रोवर तकनीक आधारित हदबरारी (सीमांकन) प्रदर्शन कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
किसानों और ग्रामीणों ने देखा रोवर तकनीक से भूमि का सीमांकन
कार्यक्रम के दौरान गाटा संख्या-1187 में रोवर तकनीक से भूमि का सीमांकन कर किसानों और ग्रामीणों को इसकी पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रणाली ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित है, जो भूमि की वास्तविक स्थिति का अत्यंत सटीक निर्धारण करती है।
पड़ोसी खेतों को लेकर होने वाले विवादों में आएगी कमी
राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर ने कहा कि प्रदेश सरकार राजस्व विभाग में आधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू कर रही है जिससे वर्षों से लंबित भूमि विवादों का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि रोवर तकनीक के उपयोग से सीमांकन पहले की तुलना में अधिक सटीक, विश्वसनीय और पारदर्शी होगा। इससे किसानों को अपनी भूमि की वास्तविक सीमा का स्पष्ट पता चलेगा और पड़ोसी खेतों को लेकर होने वाले विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक सीमांकन व्यवस्था में कई बार मानवीय त्रुटियों और विवादों की संभावना बनी रहती थी, लेकिन उपग्रह आधारित रोवर तकनीक से कुछ सेंटीमीटर तक की सटीकता के साथ भूमि की नाप-जोख संभव होगी। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी तेज होगी और आम लोगों को सीमांकन के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
तकनीकी विशेषज्ञों ने समझाई रोवर उपकरण के संचालन की पूरी प्रक्रिया
कार्यक्रम में मौजूद राजस्व अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने किसानों को रोवर उपकरण के संचालन की पूरी प्रक्रिया समझाई। लाइव प्रदर्शन के दौरान किसानों ने आधुनिक तकनीक को करीब से देखा और जाना कि किस प्रकार डिजिटल माध्यम से खेतों की वास्तविक सीमा का निर्धारण किया जाता है। किसानों ने इसे भूमि विवादों के समाधान की दिशा में एक प्रभावी और भरोसेमंद पहल बताया।

उपलब्ध होगा भूमि का प्रमाणिक और सटीक रिकॉर्ड
राजस्व अधिकारियों के अनुसार रोवर तकनीक लागू होने से सीमांकन संबंधी मामलों का निस्तारण पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से होगा। इससे राजस्व न्यायालयों और अन्य अदालतों में लंबित भूमि विवादों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसानों को उनकी भूमि का प्रमाणिक और सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य में विवाद की संभावनाएं काफी हद तक समाप्त हो सकेंगी।
राजस्व विभाग का मानना है कि रोवर तकनीक का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में भी होने से भूमि प्रबंधन व्यवस्था अधिक आधुनिक, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बन सकेगी। इस अवसर पर एसडीएम आकाश सिंह, तहसीलदार ऋतुराज शुक्ला, राजस्व विभाग के अधिकारी, लेखपाल, कानूनगो सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।






