सीतापुर, 11 जून 2026:
सीतापुर की सदर तहसील के कचनार गांव में सरकारी तालाब की जमीन पर बने अवैध मदरसे को लेकर प्रशासन की सख्ती का असर नजर आया। जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश के बाद मदरसा संचालकों ने खुद ही भवन को गिराना शुरू कर दिया। मजदूर हैमर, हथौड़ों और अन्य उपकरणों की मदद से निर्माण ध्वस्त करते दिखाई दिए।
प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक कचनार गांव में करीब चार बीघा तालाब की सरकारी भूमि पर लगभग 15 वर्ष पहले जामिया अब्दुल्लाह बिन मसऊद मदरसे का निर्माण कराया गया था। भूमि पर कब्जे की शिकायत मिलने के बाद तहसील प्रशासन ने जांच शुरू की थी। जांच में मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

बताया जा रहा है कि 8 जून को जिलाधिकारी न्यायालय ने मदरसे को खाली कर तालाब की जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का आदेश दिया था। साथ ही अवैध निर्माण कराने वालों पर करीब 10.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। निर्माण हटाने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय की गई थी।
समय सीमा पूरी होने से पहले ही मदरसा संचालकों ने भवन गिराने का काम शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की संभावित कार्रवाई और जुर्माने के दबाव के चलते निर्माण से जुड़े लोगों ने खुद ही दीवारें और छत तोड़नी शुरू कर दीं।

ग्रामीणों के मुताबिक इलाके में दिनभर ध्वस्तीकरण का काम चलता रहा। संचालक व उनके कारिंदे आते-जाते रहे। उधर प्रशासन का कहना है कि तालाब की जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराकर उसके मूल स्वरूप में बहाल करना प्राथमिकता है। फिलहाल निर्माण हटाने की प्रक्रिया जारी है और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।






