लखनऊ, 18 मार्च 2026:
यूपी में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए विश्व बैंक, भारत सरकार और प्रदेश सरकार के बीच नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम) को 299.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलेगी।
यह कार्यक्रम परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए एकीकृत समाधान लागू करने पर केंद्रित होगा। इसके जरिए न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण का लाभ मिलने की उम्मीद है। एमओयू पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्वच्छ वायु प्रबंधन प्राधिकरण की सीईओ और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बी. चंद्रकला, भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने हस्ताक्षर किए।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक विकास, उत्पादकता और पर्यावरणीय संतुलन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए प्रदेश की समृद्धि केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि स्वच्छ आकाश, स्वस्थ नागरिकों और सतत पर्यावरण से भी मापी जाएगी।
विश्व बैंक के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी के अनुसार यह कार्यक्रम परिवहन और एमएसएमई क्षेत्रों में लगभग 150 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों और तीन-पहिया वाहनों को बढ़ावा, उद्योगों में उत्सर्जन निगरानी प्रणाली और स्वच्छ तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
इसके अलावा कार्यक्रम के तहत प्रदेश के करीब 39 लाख घरों को स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा, 700 से अधिक ईंट भट्ठों में संसाधन, कुशल तकनीक और किसानों को कुशल उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह पहल विश्व बैंक के इंडो-गंगा मैदान और हिमालयी तलहटी क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा है। इसकी अवधि 10 वर्ष निर्धारित की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल उत्तर प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल और सतत विकास की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेगी।






