लखनऊ, 14 मई 2026:
वैश्विक स्तर पर गहराते तेल संकट और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब उत्तर प्रदेश की सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के संदेश के बाद गुरुवार को राजधानी लखनऊ में सत्ता और सिस्टम ने साइकिल मॉडल अपनाकर बड़ा संदेश दिया। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना और एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन सरकारी गाड़ियां छोड़ साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना गुरुवार सुबह 10 कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास से विधानसभा स्थित कार्यालय तक साइकिल चलाकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की जो अपील की है उसका पालन करना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने साफ कहा कि देश की बड़ी विदेशी मुद्रा पेट्रोलियम उत्पादों पर खर्च होती है। इसलिए ईंधन बचाना राष्ट्रहित का विषय है। खन्ना ने घोषणा की कि वह सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल से कार्यालय जाएंगे।

उधर, संजय गांधी पीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन भी सरकारी वाहन छोड़कर साइकिल से ऑफिस पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनका कार्यालय आवास से करीब 600 मीटर दूर है। इसलिए उन्होंने स्वयं साइकिल चलाकर संस्थान में ईंधन बचत अभियान की शुरुआत की है। प्रो. धीमन ने कहा कि अब SGPGI के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस माहौल में ढाला जाएगा और वह स्वयं कार्यालय से लेकर ओपीडी तक साइकिल से ही जाएंगे।
इसी बीच यूपी विधान परिषद ने भी खर्च और ईंधन कटौती की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने परिषद की संसदीय समितियों के पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम अगले आदेश तक स्थगित कर दिए हैं। प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि अब जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों में शामिल होंगे।
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी काफिलों व फ्लीट में 50 प्रतिशत कटौती का फैसला कर चुके हैं। अब यह अभियान सत्ता से सिस्टम तक ‘ईंधन अनुशासन’ का नया मॉडल बनता दिखाई दे रहा है।






