
लखनऊ, 21 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ की अलीगंज कॉलोनी में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की दर्दनाक मौत के बाद आखिरकार अवैध निर्माण के खिलाफ एक्शन शुरू हुआ। हादसे के बाद सवालों के घेरे में आए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और संबंधित विभागों ने अब अलीगंज सेक्टर-डी स्थित उस अवैध बहुमंजिला व्यावसायिक भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। एलडीए के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद बिल्डर पक्ष ने स्वयं ही अवैध स्ट्रक्चर को तोड़ना शुरू कर दिया है।
एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला व अन्य द्वारा अलीगंज के सेक्टर-डी में प्लॉट नंबर एमएस-102 पर अवैध रूप से व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया गया था। मामले में विहित प्राधिकारी न्यायालय ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा 27(1) के तहत कार्रवाई की।
उन्होंने बताया कि 23 जून को विपक्षी को नोटिस जारी कर निर्माण की वैधता से संबंधित साक्ष्य 15 दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 7 जुलाई को मामले की पहली सुनवाई हुई। विपक्षी के अधिवक्ता की अपील पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए एक दिन का समय दिया गया। 8 जुलाई को आपत्ति दाखिल की गई जिस पर प्रवर्तन जोन-4 की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया।

गत 9 जुलाई को विहित प्राधिकारी न्यायालय ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों का परीक्षण किया। इसके बाद 10 जुलाई को व्यावसायिक निर्माण को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किए गए। आदेश के तहत विपक्षी को स्वयं अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। इसकी अवधि 25 जुलाई को पूरी होनी है।
हालांकि समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोमवार को बिल्डर पक्ष ने अवैध स्ट्रक्चर को तोड़ने का काम शुरू करा दिया। सूचना मिलने पर प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया। जोनल अधिकारी ने मौके पर मौजूद विपक्षी के प्रतिनिधियों को बरसात के मौसम को देखते हुए सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि लापरवाही के कारण किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी विपक्षी की होगी। इस संबंध में लिखित पत्र भी जारी किया गया है। एलडीए के अनुसार 25 जुलाई को निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद स्थल का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। यदि ध्वस्तीकरण आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं मिला तो प्राधिकरण स्वयं अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।






